• Home
  • News
  • 2.5 lakh tribal students caught in the crossfire between Delhi and Ranchi! ₹364 crore in scholarship funds is owed by the Centre; Welfare Minister Chamra Linda met the Union Minister.

दिल्ली-रांची की खींचतान में पिसे ढाई लाख आदिवासी छात्र! केंद्र पर बकाया हैं छात्रवृत्ति के ₹364 करोड़, कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने केंद्रीय मंत्री से की मुलाकात

editor
  • Tapas Vishwas
  • June 27, 2026 12:06 PM
2.5 lakh tribal students caught in the crossfire between Delhi and Ranchi! ₹364 crore in scholarship funds is owed by the Centre; Welfare Minister Chamra Linda met the Union Minister.

रांची। झारखंड के करीब ढाई लाख अनुसूचित जनजाति (ST) के विद्यार्थियों का भविष्य इस समय अधर में लटका हुआ है। केंद्र और राज्य सरकार के बीच जारी प्रशासनिक व वित्तीय खींचतान के कारण चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के शुरू होने के बाद भी छात्रों को उनके हक की छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) नहीं मिल पा रही है। आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड के एसटी विद्यार्थियों की प्री और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति की लगभग 364 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि केंद्र सरकार पर बकाया है। इस बकाये फंड को जारी कराने के लिए राज्य के कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने मोर्चा संभालते हुए सीधे दिल्ली का रुख किया है।

झारखंड के कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने इस गंभीर संकट को लेकर केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल उरांव से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की। मंत्री लिंडा ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 का प्री-मैट्रिक का 28 करोड़ और पोस्ट-मैट्रिक का लगभग 336 करोड़ रुपये का केंद्रांश अब तक बकाया है। इसके साथ ही राज्य ने चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भी केंद्रांश जारी करने की पुरजोर वकालत की है। मुलाकात के बाद सकारात्मक संकेत देते हुए केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव ने मामले को गंभीरता से लिया है और अपने विभागीय सचिव को सभी आवश्यक कागजी प्रक्रियाएं पूरी कर जल्द से जल्द राशि आवंटित करने का कड़ा निर्देश दिया है। फंडिंग के इस संकट का असर पिछले साल भी देखने को मिला था। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जब केंद्र से फूटी कौड़ी भी नहीं मिली, तो झारखंड सरकार ने विद्यार्थियों के हित को देखते हुए अपने राज्यांश से 40 फीसदी राशि की आपातकालीन निकासी कर छात्रों के बीच वितरित की थी, ताकि उनकी पढ़ाई न रुके। कल्याण विभाग के दस्तावेजों के अनुसार, राज्य ने 14 जुलाई 2025 को एरियर मिलाकर लगभग 66 करोड़ की मांग की थी, जिसे बाद में दिसंबर 2025 के केंद्रीय पत्र के आलोक में संशोधित कर 28 करोड़ किया गया। वहीं, पोस्ट-मैट्रिक के लिए 14 जुलाई 2025 को 336 करोड़ और फिर 20 मई 2026 को चालू वर्ष के लिए 138 करोड़ रुपये की मांग केंद्र सरकार से की गई, जो अब तक अप्राप्त है। यह छात्रवृत्ति उन विद्यार्थियों को मिलती है, जिनके परिवार की वार्षिक आय ₹2.5 लाख तक है। इसके तहत हॉस्टल (छात्रावास) में रहने वाले और डे-स्कॉलर छात्रों के लिए अलग-अलग चार ग्रुप बनाकर राशि का निर्धारण किया जाता है। कल्याण विभाग के अधिकारियों का साफ कहना है कि छात्रवृत्ति योजना दोनों सरकारों के संयुक्त तत्वावधान में चलती है। दोनों ओर से राशि रिलीज होने के बाद ही भुगतान का नियम है, इसलिए देरी हो रही है। इस आरोप को सिरे से खारिज किया गया है कि राज्य समय पर उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं भेजता। राज्य ने सभी आवश्यक दस्तावेज केंद्र को समय पर सौंप दिए हैं। इधर, पूर्व विभागीय नेतृत्व का कहना है कि समस्या केंद्रीय स्तर पर नहीं, बल्कि राज्य के डेटा मैनेजमेंट में है। चूंकि अब सारी प्रक्रिया और भुगतान ऑनलाइन होता है, इसलिए जब राज्य सरकार छात्रों के आंकड़े भेजती है, तो नेशनल पोर्टल पर उनके मिलान (डेटा मैचिंग) में गड़बड़ी सामने आती है। राज्य सरकार को प्रक्रियाओं और छात्र डेटा को अपने स्तर पर दुरुस्त करने की जरूरत है। अब देखना होगा कि दिल्ली से हरी झंडी मिलने के बाद यह राशि झारखंड के आदिवासी छात्रों के खातों में कब तक पहुंचती है।


संबंधित आलेख: