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फर्जी नियुक्ति पत्र से 30 लाख की चपत: उत्तराखंड सचिवालय में नौकरी व फ्लैट के नाम पर बिहार के इंजीनियर से ठगी

editor
  • Tapas Vishwas
  • September 07, 2026 07:09 AM
₹30 lakh lost to fake appointment letter: Bihar engineer duped with promises of a job and a flat in the Uttarakhand Secretariat.

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में साइबर और जालसाजी का एक नया और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। उत्तराखंड सचिवालय में संविदा पर सरकारी नौकरी और सस्ते में फ्लैट दिलाने का झांसा देकर बिहार के एक उच्च शिक्षित युवक से 30 लाख रुपये ठग लिए गए। पीड़ित की शिकायत और प्रधानमंत्री कार्यालय पोर्टल से मिले निर्देशों के बाद पुलिस ने एक डिजिटल न्यूज पोर्टल के संचालक के खिलाफ थाना राजपुर में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

उत्तराखंड सचिवालय में संविदा पर सरकारी नौकरी और देहरादून में फ्लैट दिलाने का सपना दिखाकर बिहार निवासी युवक से कथित तौर पर 30 लाख रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। पीड़ित की शिकायत पर राजपुर थाना पुलिस ने डिजिटल न्यूज पोर्टल के संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस फिलहाल लेनदेन और आरोपी की भूमिका से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है। बिहार निवासी आशीष कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह मार्च 2020 में देहरादून आया था। इसी दौरान उसकी मुलाकात अभय कुमार नामक व्यक्ति से हुई। शिकायत के मुताबिक अभय ने खुद को एक डिजिटल न्यूज पोर्टल का संचालक बताते हुए उत्तराखंड सचिवालय में संविदा पर सरकारी नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया। नौकरी के बदले अलग-अलग माध्यमों से उससे करीब 25 लाख रुपये लिए गए। पीड़ित का आरोप है कि रकम लेने के बाद 30 मार्च 2020 को उसे प्रशिक्षु जिला विकास अधिकारी के पद का नियुक्ति पत्र दिया गया। हालांकि, बाद में जब नियुक्ति पत्र की जांच कराई गई तो उसके फर्जी होने की बात सामने आई। नौकरी नहीं मिलने पर आशीष ने जब अपनी रकम वापस मांगी तो कथित तौर पर आरोपी ने उसे अपमानित किया और जान से मारने की धमकी भी दी। शिकायत में पीड़ित ने नौकरी के अलावा फ्लैट के नाम पर भी रकम लेने का आरोप लगाया है। उसके मुताबिक आरोपी ने उसे एक फ्लैट दिखाया और इसके बाद कथित तौर पर पांच लाख रुपये नकद लिए। इस संबंध में एक समझौता तैयार किए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है। आशीष का आरोप है कि रकम वापस लेने के लिए आरोपी की ओर से दिए गए कई चेक बैंक में प्रस्तुत किए गए, लेकिन वे बाउंस हो गए। शिकायत में कुछ चेक आरोपी की पत्नी के नाम से होने की बात भी कही गई है। पुलिस अब इन वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजों की जांच कर रही है। मामले में डिजिटल न्यूज पोर्टल के इस्तेमाल से जुड़ा एक और आरोप सामने आया है। पीड़ित का कहना है कि आरोपी के पोर्टल पर उसके मित्र सुनील कुमार शर्मा को सरकारी नौकरी मिलने की भ्रामक खबर प्रकाशित की गई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार इससे नौकरी दिलाने के दावे को विश्वसनीय बनाने की कोशिश की गई। आशीष और सुनील ने वर्ष 2021 में राजपुर थाने में शिकायत दी थी। इसके अलावा अजय शंकर नामक एक अन्य व्यक्ति की ओर से भी रायपुर थाने में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराए जाने की बात सामने आई है। राजपुर थाना प्रभारी पीडी भट्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय के पोर्टल से प्राप्त शिकायत के आधार पर आरोपी अभय कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब मामले में पैसों के लेनदेन, कथित नियुक्ति पत्र, समझौते और चेक समेत अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामला दर्ज होने के बाद एक बार फिर यह सवाल सामने आया है कि सरकारी नौकरी और मकान का लालच देकर लोगों से बड़ी रकम ऐंठने वाले फर्जीवाड़े से कैसे बचा जाए। नौकरी के नाम पर किसी भी व्यक्ति या संस्था को रकम देने से पहले संबंधित विभाग से नियुक्ति और दस्तावेजों का सत्यापन करना बेहद जरूरी है।
 


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