समस्तीपुर को ₹228 करोड़ की सौगात: अब बुझेगी हर कंठ की प्यास, खत्म होगी पानी के लिए जंग
समस्तीपुर। समस्तीपुर शहर में वर्षों से जारी भीषण पेयजल संकट अब बीते दिनों की बात होने वाली है। शहरवासियों को बूंद-बूंद पानी के लिए होने वाली रोज की मशक्कत और 'पानी की जंग' से स्थाई मुक्ति मिलने का रास्ता साफ हो गया है। बिहार सरकार ने अमृत 2.0 मिशन के तहत समस्तीपुर शहरी जलापूर्ति परियोजना के लिए ₹228.45 करोड़ की भारी-भरकम राशि को प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। इस ऐतिहासिक कदम से न केवल शहर का जल संकट दूर होगा, बल्कि समस्तीपुर के विकास को एक नई और आधुनिक दिशा भी मिलेगी। समस्तीपुर शहर की सबसे बड़ी विडंबना यह रही है कि हर साल गर्मी आते ही यहां के नल सूख जाते हैं। जलस्तर नीचे चले जाने और कम जलदाब (लो प्रेशर) के कारण पानी के लिए त्राहि-त्राहि मच जाती है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत पूरे शहर में नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जल भंडारण क्षमता (वॉटर टैंक) को बढ़ाया जाएगा और पूरे वितरण नेटवर्क को पूरी तरह आधुनिक बनाया जाएगा। इसका सीधा लाभ उन हजारों परिवारों को मिलेगा, जो सालों से नियमित और स्वच्छ पेयजल के लिए तरस रहे हैं। शहर के कई ऐसे मुख्य और घनी आबादी वाले वार्ड हैं, जहां गर्मियों के दौरान स्थिति बेहद नारकीय हो जाती है। इस परियोजना के धरातल पर उतरने से निम्नलिखित क्षेत्रों की तस्वीर बदलेगी। जिन परिवारों के पास निजी बोरिंग की सुविधा नहीं है, उन्हें सार्वजनिक नलों या टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है। इस योजना के बाद हर घर तक सुचारू रूप से पानी पहुंचेगा। इस ऐतिहासिक मंजूरी के बाद शहर के लोगों में उम्मीद की नई किरण जगी है, तो वहीं कुछ आशंकाएं भी हैं।
स्टेशन रोड के निवासी मोहन कुमार, मोहम्मद शमीम और कृष्ण कुमार ने कहा कि अब बोरिंग का पानी भी भरोसेमंद नहीं रहा। मोटर और बिजली के बिल पर हर साल हजारों रुपये फूंकने पड़ते हैं। सरकारी जलापूर्ति मजबूत होने से आम जेब को बड़ी राहत मिलेगी। वहीं, काशीपुर के रंजीत कुमार और भोलेनाथ सिंह ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा, "पैसा मंजूर होना अच्छी बात है, लेकिन काम भी समय पर होना चाहिए। केवल कागजी घोषणाओं से लोगों की प्यास नहीं बुझेगी। दूषित पेयजल के कारण शहर में फैलने वाली बीमारियों पर भी अब लगाम कसने की उम्मीद है। शहर के नामचीन चिकित्सकों डॉ. अरुण कुमार साहू, डॉ. अंशु कुमार, डॉ. विवेक कुमार और डॉ. पुष्पा रानी का मानना है कि दूषित पानी के कारण समस्तीपुर में हर साल बड़ी संख्या में लोग डायरिया, टाइफाइड और पीलिया (जौंडिस) जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आते हैं। यदि इस परियोजना के जरिए नियमित और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाता है, तो इन जलजनित बीमारियों में उल्लेखनीय कमी आएगी और लोगों का स्वास्थ्य बेहतर होगा। शहरी विकास विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि किसी भी शहर के विस्तार और विकास की पहली शर्त वहां की मजबूत आधारभूत सुविधाएं (इन्फ्रास्ट्रक्चर) होती हैं। समस्तीपुर शहर का दायरा तेजी से बढ़ रहा है, नई कॉलोनियां बस रही हैं, लेकिन उस अनुपात में जलापूर्ति नेटवर्क बेहद कमजोर था। यह ₹228.45 करोड़ की परियोजना न सिर्फ वर्तमान संकट को दूर करेगी, बल्कि अगले कई दशकों की भविष्य की जरूरतों को भी पूरा करने में सक्षम होगी। प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद अब विभाग विस्तृत तकनीकी प्रक्रिया (डीपीआर और तकनीकी मूल्यांकन) को अंतिम रूप देने में जुट गया है। इसके तुरंत बाद टेंडर जारी किए जाएंगे, निर्माण एजेंसी का चयन होगा और चरणबद्ध तरीके से धरातल पर पाइपलाइन बिछाने व जल मीनारों के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ता अविनाश सिंह बादल, ललन यादव और अनस रिजवान ने कहा कि यह योजना समस्तीपुर के इतिहास में मील का पत्थर साबित हो सकती है। हालांकि, प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्माण कार्य तय समय सीमा के भीतर, पूरी पारदर्शिता और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा हो, ताकि जनता के पैसे का सही उपयोग हो सके। समस्तीपुर की जनता अब उम्मीद लगाए बैठी है कि जल्द ही उनके घरों की टोंटियों से शुद्ध जल की धारा बहेगी।