केदारनाथ यात्रा मार्ग पर जिंदगी और मौत की जंग: खाई में गिरे युवक का सफल रेस्क्यू, कानपुर के यात्री की मौत
रुद्रप्रयाग। विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम की यात्रा इन दिनों अपने पूरे शबाब पर है, लेकिन कठिन भूगोल और बदलता मौसम यात्रियों की कड़ी परीक्षा ले रहा है। पिछले 24 घंटों के भीतर यात्रा मार्ग पर साहस और हादसे की कई तस्वीरें सामने आईं। जहां एक ओर सुरक्षा बलों ने अपनी सूझबूझ से तीन लोगों को मौत के मुंह से बाहर निकाला, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के एक यात्री की अचेत होने के बाद मृत्यु हो गई।
पहली घटना सोनप्रयाग हनुमान बैरियर के समीप हुई। बीती रात सूचना मिली कि एक व्यक्ति अनियंत्रित होकर सड़क से करीब 30 से 40 मीटर गहरी खाई में गिर गया है। उप निरीक्षक आशीष डिमरी के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम ने बिना समय गंवाए अंधेरे और दुर्गम ढलानों के बीच सर्च ऑपरेशन चलाया। घायल युवक को स्ट्रेचर की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद खाई से बाहर निकाला गया और सोनप्रयाग अस्पताल पहुंचाया गया। करीब 35 वर्षीय इस युवक की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। दुखद खबर बड़ी लिनचोली ग्लेशियर क्षेत्र से आई। यहाँ उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर (नवाबगंज) निवासी 42 वर्षीय आकाश अचेत अवस्था में मिले। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ और राहत दल ने संयुक्त रेस्क्यू अभियान चलाकर उन्हें मेडिकल रिलीफ पोस्ट पहुंचाया। हालांकि, डॉक्टरों ने गहन परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के चलते यह एक और दुखद क्षति है। यात्रा मार्ग पर ही चिरबासा हेलीपैड के पास हिमाचल प्रदेश के 45 वर्षीय यात्री कैलाश शर्मा अचानक पैदल चलते हुए बेहोश होकर गिर पड़े। मौके पर मौजूद बचाव दल ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए तुरंत 'सीपीआर' देना शुरू किया। टीम की तत्परता का ही परिणाम था कि कुछ ही देर में कैलाश शर्मा को होश आ गया। उन्हें तुरंत गौरीकुंड मेडिकल पोस्ट में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति अब स्थिर है। एक अन्य रोमांचक रेस्क्यू गरुड़ चट्टी के समीप रुद्रा पॉइंट पर देखने को मिला। राजस्थान निवासी 24 वर्षीय जितेंद्र उर्फ जीतू नदी के ऊपर एक बेहद खतरनाक पहाड़ी पर फंस गया था। रास्ता बंद होने के कारण वह न आगे जा पा रहा था और न पीछे। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ की टीम ने दुर्गम और जोखिम भरे क्षेत्र में रस्सियों के सहारे युवक तक पहुंच बनाई और उसे सुरक्षित नीचे उतारा।