माध्यमिक शिक्षा विभाग में बड़ा खेल: नियमित वेतन छोड़ पहले बांटा गया अवशेष! सरकार के जीरो टॉलरेंस की धज्जियां उड़ा रहे अधिकारी
अयोध्या। माध्यमिक शिक्षा विभाग में वित्तीय अनियमितता का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि शासन की स्पष्ट नियमावली की अनदेखी करते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय ने नियमित वेतन के बजाय पहले अवशेष वेतन का भुगतान कर दिया। इसके परिणामस्वरूप जिले के सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों एवं कर्मचारियों का नियमित वेतन समय पर उनके खातों में नहीं पहुंच सका। जानकारी के अनुसार शासन से प्राप्त अनुदान राशि के उपयोग संबंधी नियमों में स्पष्ट व्यवस्था है कि सबसे पहले नियमित वेतन का भुगतान किया जाएगा। इसके बाद यदि धनराशि शेष बचती है, तभी अवशेष देयकों का निस्तारण किया जा सकता है। बावजूद इसके लाखों रुपये के अवशेष भुगतान को प्राथमिकता दिए जाने से विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. पवन कुमार तिवारी से वार्ता करने पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि पहले नियमित वेतन का भुगतान किया जाना चाहिए या अवशेष का। उन्होंने यह भी बताया कि वित्त एवं लेखाधिकारी की ओर से इस संबंध में कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई और न ही अब तक कोई ऑडिट आपत्ति प्राप्त हुई है। उन्होंने स्वीकार किया कि यदि प्रक्रिया में कोई त्रुटि हुई है तो भविष्य में उसमें सुधार किया जाएगा। डीआईओएस के अनुसार “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर प्राप्त प्रस्तावों का भुगतान किया गया।
उनका कहना है कि कई विद्यालयों की ओर से नियमित वेतन संबंधी प्रस्ताव समय से नहीं भेजे गए थे। अतिरिक्त अनुदान की मांग शासन से की गई है और धनराशि मिलते ही नियमित वेतन का भुगतान कराया जाएगा। वहीं वित्त एवं लेखाधिकारी अनुपम से वार्ता करने पर उन्होंने जिम्मेदारी डीआईओएस कार्यालय पर डालते हुए कहा कि आहरण एवं वितरण अधिकारी जिला विद्यालय निरीक्षक होते हैं और उनके अनुमोदन के आधार पर ही भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ती है। उन्होंने कहा कि कार्यालय से वेतन और अवशेष दोनों के प्रस्ताव भेजे गए थे, लेकिन प्राथमिकता तय करना डीआईओएस का अधिकार क्षेत्र है। हमारा काम परीक्षण करना है इस पूरे मामले ने विभागीय जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिले में कुल 50 माध्यमिक और 26 संस्कृत विद्यालय है जिनमें 25 विद्यालय का वेतन हेतु ग्रांट बचा है। आरोप है कि अवशेष भुगतान में 5% का खुला लेनदेन हुआ है। इस खेल में विभाग के लिपिक का नाम भी आ रहा है। अब देखना यह है कि करोड़ों की वित्तीय अनियमितता में शासन प्रशासन और विभाग डीआईओएस और वित्त एवं लेखाधिकारी और कार्यालय लिपिक के विरुद्ध क्या कार्यवाही करता है। शिक्षकों में नाराजगी व्याप्त है और मांग उठ रही है कि नियमों की अनदेखी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि कर्मचारियों को उनकी गलती का खामियाजा न भुगतना पड़ेI