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ट्रांजिट कैंप दुर्गा पूजा मंच पर पार्षद की 'अनोखी मांग' बनी चर्चा का विषय! पाइपलाइन के नाम पर वाहवाही लूटने की हास्यास्पद कोशिश,क्या अपने मेयर साहब से भी टूटा भरोसा?

editor
  • Tapas Vishwas
  • October 19, 2026 08:10 AM
A councillor’s 'peculiar demand' at the Transit Camp Durga Puja stage has become a topic of discussion! It’s a laughable attempt to garner praise by invoking a pipeline project—could it be that the councillor has lost faith even in their own Mayor?

कहते हैं कि राजनीति में जब अपनों पर से भरोसा उठ जाए या फिर धरातल पर विकास के बड़े-बड़े दावे खोखले साबित होने लगें, तो कुछ ऐसे ही दिलचस्प और हास्यास्पद नजारे देखने को मिलते हैं। ऐसा ही कुछ कल रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप से देखने को मिला। जहां विकास का ढोल पीटने वाली स्थानीय सत्ता व्यवस्था और वहां के प्रतिनिधियों के जमीनी दावों की पोल एक ही मंच पर खुल गई। ऐसे में सवाल यह है कि जब रुद्रपुर में विधायक, नगर निगम के महापौर और क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद हैं, तो आखिर वार्ड की विकास संबंधी मांग को लेकर दूसरे विधानसभा क्षेत्र के दर्जा मंत्री के सामने गुहार लगाने की जरूरत क्यों पड़ी?

आपको बता दें कि जनपद ऊधम सिंह नगर के बंगाली बहुल क्षेत्रों में इन दिनों दुर्गा पूजा का उल्लास चरम पर है। मां दुर्गा की भक्ति और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच रोज बड़ी हस्तियों और अतिथियों का आना-जाना लगा हुआ है। लेकिन कल यानी महाअष्टमी की शाम ट्रांजिट कैंप स्थित दुर्गा पूजा पंडाल का सांस्कृतिक मंच केवल भक्ति और कला तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीति और हास्यास्पद ड्रामेबाजी का अखाड़ा बन गया। घटनाक्रम के अनुसार, कार्यक्रम में अतिथि के तौर पर शक्तिफॉर्म क्षेत्र से एक दर्जा राज्य मंत्री पहुंचे थे। इसी दौरान वार्ड नंबर 3 के कांग्रेस पार्षद ने दर्जा मंत्री को अपने क्षेत्र में 'हर घर जल योजना' के तहत पाइपलाइन बिछाने की मांग का ज्ञापन सौंप दिया। ऊपर से देखने पर यह लग सकता है कि पार्षद महोदय अपने वार्ड के विकास को लेकर कितने चिंताग्रस्त और सजग हैं! लेकिन अगर इस घटना के पीछे की हकीकत को देखें, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या रुद्रपुर का विकास पूरी तरह ठप हो चुका है? अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस रुद्रपुर में मौजूदा विधायक, नगर निगम के अति-प्रिय मेयर और यहां तक कि खुद बंगाली समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रभावशाली दर्जा मंत्री मौजूद हैं, वहां का पार्षद अपने वार्ड के विकास के लिए पड़ोसी विधानसभा से आए दर्जा मंत्री के आगे झोली फैलाने को क्यों मजबूर हुआ? क्या पार्षद को अपने ही शहर के विधायक और अपने ही निगम के 'बड़े भैया' यानी मेयर साहब पर तनिक भी भरोसा नहीं रहा? या फिर रुद्रपुर के ये तमाम दिग्गज जन-प्रतिनिधि अपने ही शहर की बुनियादी समस्याओं को हल करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं? पार्षद महोदय की इस 'अनोखी मांग' की बचकानी और हास्यास्पद बात यहीं खत्म नहीं होती। जिस दर्जा मंत्री को यह ज्ञापन सौंपा गया, वे पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा के बेहद करीबी तो माने जाते हैं, लेकिन उनके पास जल निगम या पेयजल से जुड़ा कोई विभाग ही नहीं है! ऐसे में जिस मंत्री के अधिकार क्षेत्र में वह विषय आता ही नहीं, उनसे पाइपलाइन की मांग करना केवल जनता की आंखों में धूल झोंकने और सस्ती वाहवाही लूटने के सिवा और क्या कहा जा सकता है? मामला तब और भी हास्यास्पद हो गया जब सूत्रों से जानकारी मिली कि जिस पाइपलाइन योजना को लेकर पार्षद जी ने इतना नाटक रचा, वह योजना पहले से ही जल निगम द्वारा स्वीकृत हो चुकी है! यानी जो काम पहले से मंजूर है, उसे अपनी 'मेहनत' और 'मांग' के रूप में भुनाने का यह प्रयास जनता के सामने हास्यास्पद साबित हो गया। दुर्गा पूजा के इस पवित्र मंच पर पार्षद को बंगाली समाज की वास्तविक समस्याओं और बुनियादी प्राथमिकताओं पर खुलकर बात करनी चाहिए थी। लेकिन अपनी ही व्यवस्था से निराश या केवल सुर्खियों में बने रहने की होड़ में पार्षद सब कुछ भूल बैठे। आज पूरे क्षेत्र में इस बात की जोरदार चर्चा है कि जब अपनों से उम्मीद टूटती है, तो इंसान बिना सोचे-समझे किसी के भी आगे हाथ फैलाने लगता है भले ही सामने वाला उस काम को करने में सक्षम ही न हो!


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