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महिला आरक्षण पर उत्तराखंड विधानसभा में जबरदस्त टकराव! सदन के भीतर तीखी बहस और हंगामा, बाहर कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन

editor
  • Awaaz Desk
  • April 28, 2026 11:04 AM
A fierce confrontation erupted in the Uttarakhand Assembly over women's reservations. A heated debate and uproar erupted inside the House, followed by a violent Congress protest outside.

देहरादून। महिला आरक्षण के मुद्दे पर उत्तराखंड विधानसभा का विशेष सत्र मंगलवार को सियासी टकराव का केंद्र बन गया। सदन के भीतर जहां पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला, वहीं बाहर कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन कर सरकार को घेरने की कोशिश की। इस दौरान कई कांग्रेस नेताओं को हिरासत में भी लिया गया। सत्र शुरू होने से पहले ही कांग्रेस विधायक और कार्यकर्ता जुलूस निकालकर विधानसभा पहुंचे। कांग्रेस विधायक वीरेंद्र जाति ने विधानसभा के मुख्य गेट पर गन्ने से भरी ट्राली पलटकर विरोध दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि इकबालपुर चीनी मिल पर किसानों का करीब 110 करोड़ रुपये बकाया है, लेकिन सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। वे खुद ट्रैक्टर चलाकर विधानसभा पहुंचे, जिससे माहौल और गरमा गया। वहीं कांग्रेस विधायकों ने रिस्पना पुल से रैली निकालते हुए विधानसभा तक मार्च किया और अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने व महिला आरक्षण बिल को तत्काल लागू करने की मांग को लेकर नारेबाजी की। सदन के भीतर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में नारी शक्ति के योगदान को रेखांकित करते हुए केंद्र सरकार के नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन की अपील की। उन्होंने कहा कि इस विषय पर राजनीति से ऊपर उठकर सभी को एकमत होना चाहिए। उन्होंने इतिहास और वर्तमान में महिलाओं की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि हर क्षेत्र में महिलाएं देश का नाम रोशन कर रही हैं। सीएम धामी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिलाओं को उनका अधिकार देने में कांग्रेस कभी गंभीर नहीं रही। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आरक्षण लागू होता है तो इससे किसी का नुकसान नहीं, बल्कि महिलाओं को उनका हक मिलेगा। वहीं नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार पर पलटवार करते हुए महिला आरक्षण के मुद्दे को संवेदनशील बताते हुए केंद्र और राज्य सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2023 में कानून बनने के बावजूद इसे लागू करने में देरी क्यों हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल वादे कर रही है और वास्तविकता में महिलाओं को उनका अधिकार नहीं मिल रहा। आर्य ने यह भी कहा कि यदि जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया लंबी चली तो 2029 तक आरक्षण लागू करना संभव नहीं होगा। उन्होंने भाजपा पर केवल सपने दिखाने का आरोप लगाया। महिला आरक्षण के मुद्दे पर सदन के भीतर और बाहर जारी इस टकराव ने राज्य की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बहस और तेज होने के आसार हैं।
 


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