ये न्याय का पहला कदम: पैलेट गन पीड़ित छात्र की एफआईआर के लिए संसद मार्ग थाने में 5 घंटे धरने पर बैठे राहुल गांधी, झुकी पुलिस
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था के मुद्दों को लेकर हुए छात्र आंदोलन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन की चोट से घायल हुए छात्र साहिल लोचव के मामले में बड़ा मोड़ आ गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को पीड़ित छात्र और उसकी मां के साथ संसद मार्ग थाने पहुंचे। जब पुलिस ने तुरंत शिकायत पर कार्रवाई नहीं की, तो राहुल गांधी थाने परिसर में ही धरने पर बैठ गए। करीब पांच घंटे तक चले इस हाई-प्रोफाइल धरने के बाद दिल्ली पुलिस को मांग माननी पड़ी और अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई।
एफआईआर दर्ज होने के बाद राहुल गांधी ने मीडिया से कहा, "यह न्याय की दिशा में पहला कदम है। हमारी सिर्फ इतनी मांग थी कि पीड़ित छात्र को न्याय मिले और उसकी शिकायत पर कानून के मुताबिक मामला दर्ज हो। पुलिस को एफआईआर दर्ज करने से आखिर कौन रोक रहा था? इसमें पुलिस की नहीं, बल्कि ऊपर से दबाव बनाने वालों की गलती है। पूरा मामला 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर 'कॉकरेज जनता पार्टी' के नेतृत्व में आयोजित छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है। संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई थी, जिसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया। आरोप है कि इसी कार्रवाई के दौरान साहिल लोचव पैलेट से गंभीर रूप से घायल हो गया था। साहिल के अनुसार, उसके शरीर में कई पैलेट लगे, जिससे उसकी आंख की रोशनी पर भी असर पड़ा और उसे जटिल सर्जरी से गुजरना पड़ा। महीनों तक चक्कर काटने के बाद भी जब पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया, तब उसने राहुल गांधी से न्याय की गुहार लगाई थी। कांग्रेस के अनुसार, साहिल लोचव ने 14 अगस्त को दिल्ली पुलिस को लिखित शिकायत सौंपी थी, लेकिन उस पर न तो कोई पावती मिली और न ही जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। 17 अगस्त को दोबारा ईमेल और फोन से संपर्क के बावजूद कोई ढील नहीं टूटी। इसके बाद 21 अगस्त को राहुल गांधी खुद पीड़ित परिवार के साथ संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे, जहां डीसीपी का कार्यालय भी है। जब मौके पर बात नहीं बनी, तो राहुल गांधी वहीं धरने पर बैठ गए। 5 घंटे के सियासी ड्रामे के बाद आखिरकार पुलिस को एफआईआर दर्ज करनी पड़ी। पीड़ित छात्र साहिल लोचव ने राहत की सांस लेते हुए कहा कि महीनों की मशक्कत और राहुल गांधी के सहयोग के बाद अब जाकर उसकी सुनवाई हुई है। कांग्रेस ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश देने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।