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अयोध्या में दिखेगी देवभूमि की झलक: 54,000 वर्ग फीट में बनेगा उत्तराखंड अतिथि गृह

editor
  • Tapas Vishwas
  • April 25, 2026 12:04 PM
A Glimpse of the 'Land of the Gods' in Ayodhya: Uttarakhand Guest House to be Built Across 54,000 Square Feet

देहरादून। श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में अब देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक छटा बिखरेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन को धरातल पर उतारते हुए उत्तराखंड सरकार ने अयोध्या में एक भव्य राज्य अतिथि गृह के निर्माण की कवायद तेज कर दी है। अयोध्या-फैजाबाद हाईवे पर स्थित लगभग 54,000 वर्ग फीट के विशाल भूखंड पर इस परियोजना को आकार दिया जाएगा। हाल ही में सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया।प्रस्तावित अतिथि गृह की लोकेशन श्रद्धालुओं के लिहाज से बेहद सुविधाजनक चुनी गई है। यह स्थान श्रीराम मंदिर से मात्र 6.60 किलोमीटर और फैजाबाद शहर से 6.40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अयोध्या एयरपोर्ट से इसकी दूरी महज 10 किलोमीटर है, जिससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए यहाँ पहुँचना बेहद आसान होगा। इसके अलावा, लखनऊ, वाराणसी और प्रयागराज जैसे प्रमुख धार्मिक केंद्रों से सीधा जुड़ाव इसे पर्यटन का मुख्य हब बनाएगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह परिसर केवल वीआईपी (VIP) सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री धामी की रणनीति के अनुसार, यहाँ उत्तराखंड से आने वाले आम श्रद्धालुओं के लिए बेहद किफायती दरों पर ठहरने की उत्तम व्यवस्था की जाएगी। इससे उन गरीब और मध्यमवर्गीय तीर्थयात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी जो अयोध्या दर्शन के लिए पहुँचते हैं। इस अतिथि गृह को केवल एक विश्राम स्थल के रूप में नहीं, बल्कि 'सांस्कृतिक केंद्र' के रूप में विकसित किया जाएगा। यहाँ उत्तराखंड की लोक कला, संगीत, पारंपरिक उत्सव और 'सरस मेलों' का आयोजन होगा, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की पहचान मजबूत होगी। साथ ही, परिसर को विवाह समारोहों और सामाजिक आयोजनों के लिए भी उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे सरकार को राजस्व की प्राप्ति होगी। निरीक्षण के दौरान सचिव आवास के साथ पेयजल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर राकेश चन्द्र तिवारी और राज्य संपत्ति विभाग की डॉ. विनीता सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। सचिव जल्द ही मुख्यमंत्री को विस्तृत कार्ययोजना (DPR) सौंपेंगे, जिसके बाद निर्माण कार्य को गति दी जाएगी। यह पहल न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक सेतु का काम भी करेगी।


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