• Home
  • News
  • A harrowing scene from the mountains: A fallen soldier's ancestral village still awaits a road! Villagers had to strap a sick person to a chair and carry them for three kilometers across rugged terrain.

पहाड़ों की दर्दनाक तस्वीरः सड़क के इंतजार में बलिदानी सैनिक का पैतृक गांव! बीमार को कुर्सी में बांधकर दुर्गम रास्ते से तीन किलोमीटर तक ले गए ग्रामीण

editor
  • Awaaz Desk
  • October 14, 2026 07:10 AM
A harrowing scene from the mountains: A fallen soldier's ancestral village still awaits a road! Villagers had to strap a sick person to a chair and carry them for three kilometers across rugged terrain.

बागेश्वर। उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों में सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव आज भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसकी बानगी बागेश्वर जिले के दोबाड़ गांव के मिरी तोक में देखने को मिली, जहां पेट दर्द और बुखार से पीड़ित 68 वर्षीय तुलसी देवी को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को तीन किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा। सड़क तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों ने प्लास्टिक की कुर्सी में बुजुर्ग महिला को बांधा और दो बांस के डंडों के सहारे कंधों पर उठाकर ले गए। इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत को उजागर कर दिया है। ग्रामीण चंचल देव के अनुसार, तुलसी देवी की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। गांव में सड़क की सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें वाहन से अस्पताल ले जाना संभव नहीं था। ऐसे में गांव के मोहन सिंह, लक्ष्मण सिंह और कल्याण सिंह ने प्लास्टिक की कुर्सी में दो बांस के डंडे बांधकर डोली तैयार की। इसके बाद तीनों ग्रामीण बुजुर्ग महिला को लेकर करीब तीन किलोमीटर पैदल चले और उन्हें सड़क तक पहुंचाया। बीमारी से परेशान बुजुर्ग महिला को इस तरह ले जाने की मजबूरी ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और रोजगार जैसी सुविधाओं के अभाव में कई परिवार गांव छोड़कर पलायन कर चुके हैं। युवा रोजगार की तलाश में शहरों का रुख कर रहे हैं, जबकि गांवों में बड़ी संख्या में बुजुर्ग अपने पुश्तैनी घरों में रह रहे हैं। ऐसे में किसी बुजुर्ग या बीमार व्यक्ति की तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल पहुंचाना परिवार और ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। दोबाड़ गांव कारगिल युद्ध में बलिदान देने वाले सैनिक मोहन सिंह दानू का पैतृक गांव है। शहादत के बाद उन्हें वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गांव में सड़क निर्माण की घोषणा की थी, लेकिन सड़क की जरूरत आज भी बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ में सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि आपात स्थिति में मरीजों की जान बचाने के लिए बेहद जरूरी सुविधा है। तुलसी देवी को कुर्सी में बांधकर तीन किलोमीटर तक ले जाने की घटना इसी मजबूरी की तस्वीर पेश करती है। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी सड़क की मांग पर गंभीरता से कार्रवाई होगी, ताकि भविष्य में किसी बीमार व्यक्ति को इलाज के लिए इस तरह पैदल न ले जाना पड़े।


संबंधित आलेख: