• Home
  • News
  • A magnificent building worth crores, 800 female students, yet 'zero' teachers to instruct them: Lohardaga Women's College has 28 sanctioned posts, but the future has rested on just two teachers for five years.

करोड़ों का भव्य भवन, 800 छात्राएं पर पढ़ाने वाले शिक्षक 'शून्य': लोहरदगा महिला कॉलेज में 28 पद स्वीकृत, 5 साल से सिर्फ 2 टीचरों के भरोसे भविष्य

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 11, 2026 12:07 PM
A magnificent building worth crores, 800 female students, yet 'zero' teachers to instruct them: Lohardaga Women's College has 28 sanctioned posts, but the future has rested on just two teachers for five years.

लोहरदगा। जब मैं पढ़ती थी, तब ऐसा कॉलेज नहीं था। इतना सुंदर कॉलेज भवन देखकर मेरा फिर से पढ़ने का मन करता है।" ये शब्द देश की वर्तमान राष्ट्रपति (तत्कालीन राज्यपाल) द्रौपदी मुर्मू ने 27 जनवरी 2021 को लोहरदगा के बरही में नवनिर्मित महिला महाविद्यालय के उद्घाटन के वक्त कहे थे। उनके इस बयान से आदिवासी और ग्रामीण बाहुल्य क्षेत्र की हजारों बेटियों और अभिभावकों की आंखों में उच्च शिक्षा का एक सुनहरा सपना तैर गया था। लेकिन आज पांच साल बाद, जमीनी हकीकत इस भव्य इमारत के सौंदर्य को चिढ़ा रही है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार 6461 स्क्वायर फीट में फैला यह आलीशान कॉलेज भवन अंदर से पूरी तरह खोखला साबित हो रहा है। विडंबना देखिए कि कॉलेज में करीब 800 छात्राओं का भविष्य दांव पर है, लेकिन यहां एक भी नियमित शिक्षक पदस्थापित नहीं है। 9 मुख्य विषयों की पढ़ाई का जिम्मा महज 2 कामचलाऊ शिक्षकों के कंधों पर टिक गया है।

रांची विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित इस महिला महाविद्यालय में उच्च शिक्षा के लिए बुनियादी तौर पर 9 विषयों की पढ़ाई की व्यवस्था की गई है। इनमें शामिल हैं। अंग्रेजी, हिंदी, अर्थशास्त्र, कॉमर्स, इतिहास, पॉलिटिकल साइंस, साइकोलॉजी, कुड़ुख और नागपुरी। इन विषयों को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार द्वारा शिक्षकों के 28 पद स्वीकृत किए गए हैं। इसके बावजूद वर्तमान में कॉलेज की स्थिति यह है कि यहाँ सिर्फ दो शिक्षक कार्यरत हैं—एक नागपुरी विषय के 'नीड बेस्ड' (जरूरत आधारित) शिक्षक और दूसरे अंग्रेजी के 'गेस्ट फैकल्टी'। बाकी के 7 विषयों को पढ़ाने के लिए कॉलेज में एक भी शिक्षक मौजूद नहीं है। सवाल यह उठता है कि इतिहास, अर्थशास्त्र और कॉमर्स जैसी मुख्य विधाओं की छात्राएं कॉलेज सिर्फ हाजिरी लगाने आ रही हैं? शिक्षकों के इस भयानक अकाल के बावजूद, क्षेत्र की बेटियों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का जज्बा कम नहीं हुआ है। चांसलर पोर्टल के जरिए हर साल सैकड़ों छात्राएं यहां दाखिला ले रही हैं। डिजिटल सिस्टम के जरिए ऑनलाइन नामांकन तो धड़ाधड़ हो रहे हैं, लेकिन डिजिटल युग की यह प्रशासनिक व्यवस्था इन बेटियों को क्लासरूम में 'ब्लैकबोर्ड' के सामने खड़े होने वाला शिक्षक देने में पूरी तरह नाकाम रही है। कॉलेज परिसर में शानदार बेंच-डेस्क, हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर और विशाल कमरे मौजूद हैं, जो बिना शिक्षकों के भूतिया नजर आते हैं। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि उन्होंने इस बदहाली से उबरने के लिए रांची विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को अनगिनत पत्र भेजे हैं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. शशि गुप्ता ने बेहद दुख व्यक्त करते हुए कहा "इतनी बड़ी संख्या में छात्राओं का नामांकन होने के बावजूद यहाँ नियमित शिक्षकों की पदस्थापना नहीं होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। हम लगातार विश्वविद्यालय और उच्चाधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं, ताकि बेटियों की पढ़ाई बाधित न हो। करोड़ों का इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर देने के बाद शिक्षकों की नियुक्ति भूल जाना, झारखंड की शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी विडंबना को दर्शाता है। स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि सरकार 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का नारा तो देती है, लेकिन धरातल पर बेटियों को सिर्फ खाली बेंचों पर बैठने के लिए छोड़ दिया गया है। अब देखना यह है कि सोए हुए शिक्षा विभाग और रांची विश्वविद्यालय प्रबंधन की नींद कब खुलती है, और इस महाविद्यालय को इस 'शैक्षणिक संकट' से कब आजादी मिलती है।


संबंधित आलेख: