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बिहार में औद्योगिक क्रांति की नई शुरुआत: अब महज 30 दिनों के भीतर मिलेगा बिजनेस लाइसेंस, उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह का ऐतिहासिक फैसला

editor
  • Tapas Vishwas
  • June 29, 2026 01:06 PM
A new beginning for the industrial revolution in Bihar: Business licenses to be issued within just 30 days—a historic decision by Industries Minister Shreyasi Singh.

पटना। बिहार को औद्योगिक निवेश का नया हब बनाने और सूबे में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को धरातल पर उतारने के लिए राज्य सरकार ने एक युगांतकारी कदम उठाया है। बिहार में अब छोटे से लेकर बड़े उद्योग स्थापित करने के लिए निवेशकों और स्थानीय युवाओं को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। उद्योग विभाग की नवनियुक्त मंत्री श्रेयसी सिंह ने सोमवार को एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि राज्य में उद्योग लगाने के लिए अब हर हाल में 30 दिनों के भीतर लाइसेंस निर्गत कर दिया जाएगा। यदि कोई विभाग तय समय में अपनी जांच या एनओसी पूरी नहीं करता है, तो सॉफ्टवेयर के माध्यम से 31वें दिन आवेदक को 'ऑटोमैटिक' लाइसेंस मिल जाएगा।

उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने पुरानी व्यवस्था की कमियों को स्वीकार करते हुए कहा कि पहले नियम तो 30 दिनों का था, लेकिन धरातल पर निवेशकों को महीनों तक परेशान होना पड़ता था। उन्होंने बताया, "पहले उद्योग के लिए लाइसेंस निर्गत करने के क्रम में अलग-अलग विभागों के कमिश्नर और विभिन्न मंत्रालयों से कई स्तरों पर अप्रूवल (मंजूरी) लेना पड़ता था। दूसरे विभागों में फाइलें भेजे जाने के बाद वहां से जवाब आने में काफी वक्त जाया होता था, जिससे निर्धारित समय सीमा का पालन नहीं हो पाता था।" मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब विभाग ने तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर इन सभी कमियों और अड़चनों को पूरी तरह से दुरुस्त कर लिया है। इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के पीछे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का एक कड़ा निर्देश है। उद्योग मंत्री ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री ने उद्योग विभाग को स्पष्ट आदेश जारी कर दिया है कि अगर आवेदन जमा होने के 30 दिनों के भीतर किसी भी संबंधित विभाग से अप्रूवल या फिजिकल वेरिफिकेशन (जांच प्रक्रिया) पूरी नहीं की जाती है, तो सिस्टम उसे 'डीम्ड अप्रूवल' मान लेगा। यानी 31वें दिन आवेदक का लाइसेंस डिजिटल रूप से ऑटो-जेनरेट हो जाएगा। सरकार के इस कड़े रुख के बाद अब कोई भी अधिकारी या कर्मचारी जानबूझकर फाइलों को रोक नहीं सकेगा। सरकार के इस फैसले से मैक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज सेक्टर सहित नए स्टार्टअप्स शुरू करने वाले बिहार के युवाओं में भारी उत्साह है। अब तक लोन पास होने के बाद भी केवल फैक्ट्री या यूनिट का लाइसेंस न मिलने के कारण कई परियोजनाएं अधर में लटकी रहती थीं। नया नियम लागू होने से न केवल घरेलू और बाहरी निवेश में तेजी आएगी, बल्कि राज्य के भीतर ही बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन और सेंट्रलाइज्ड कर दिया गया है, ताकि आवेदक अपने लाइसेंस का स्टेटस घर बैठे ट्रैक कर सकें।


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