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लोकतंत्र का नया स्वरूप: अब 815 सीटों वाली होगी लोकसभा, 272 महिला सांसदों से महकेगा सदन

editor
  • Tapas Vishwas
  • April 16, 2026 11:04 AM
A New Form of Democracy: The Lok Sabha Will Now Have 815 Seats, and the House Will Be Adorned by 272 Women MPs.

नई दिल्ली। भारत के संसदीय इतिहास में गुरुवार का दिन एक युगांतकारी परिवर्तन का गवाह बना। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करते हुए घोषणा की कि आगामी परिसीमन के बाद लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 543 से बढ़ाकर 815 कर दी जाएगी। इस विस्तारित सदन में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के तहत 33 प्रतिशत यानी 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

सदन को संबोधित करते हुए कानून मंत्री ने स्पष्ट किया कि संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के अनुसार, यह व्यवस्था 2029 के संसदीय चुनावों से पूरी तरह कार्यान्वित हो जाएगी। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को लागू करने के लिए सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि की जा रही है, ताकि आरक्षण का लाभ देते समय न तो मौजूदा पुरुष सांसदों के प्रतिनिधित्व पर आंच आए और न ही किसी राज्य की सीटों की हिस्सेदारी कम हो। विधेयक के अनुसार, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मेघवाल ने बताया कि चूंकि वर्तमान 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023' जनगणना के नए आंकड़ों पर आधारित था, जो 2026 के बाद ही संभव हो पाते, इसलिए सरकार ने 2029 में आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए यह नया संविधान संशोधन विधेयक पेश किया है। खास बात यह है कि महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में 'रोटेशन' (बारी-बारी) के आधार पर आवंटित की जाएंगी। कानून मंत्री ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में महिलाओं को मतदान के अधिकार के लिए दशकों तक संघर्ष करना पड़ा। अमेरिका में पुरुषों के 144 साल बाद और ब्रिटेन में 1928 में महिलाओं को पूर्ण मताधिकार मिला, जबकि भारत ने अपने पहले चुनाव से ही महिलाओं को पुरुषों के समान वोट देने का अधिकार दिया था। अब यह विधेयक उन्हें नीति-निर्धारण में समान भागीदारी सुनिश्चित करेगा। विधेयक पेश किए जाने के दौरान सदन में तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष ने परिसीमन के प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए मतदान की मांग की। हालांकि, विधेयक को 251 सदस्यों के भारी समर्थन के साथ पेश कर दिया गया, जबकि 185 सदस्यों ने इसके विरोध में मतदान किया। विपक्षी दलों का कहना है कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन परिसीमन की प्रक्रिया और इसके आधार को लेकर उनकी आपत्तियां बरकरार हैं।
 


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