नम आंखों से जनरल खंडूड़ी को अंतिम विदाई: सीएम धामी ने दिया अर्थी को कंधा,अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
उत्तराखंड के विकास के स्तंभ और बेदाग कूटनीति के प्रतीक, पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (सेनि.) की अंतिम यात्रा में आज पूरा प्रदेश उमड़ पड़ा। 'जनरल साहब अमर रहें' के गगनभेदी नारों के बीच जब उनकी अंतिम यात्रा देहरादून की सड़कों पर निकली, तो हर आंख नम थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बेहद भावुक क्षण में स्वयं पूर्व मुख्यमंत्री की अर्थी को कंधा देकर उन्हें अंतिम विदाई दी।
राज्य सरकार ने जनरल खंडूड़ी के सम्मान में तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है, जिसके तहत आज बुधवार को उनकी अंत्येष्टि के दिन प्रदेश के सभी सरकारी विभाग और कार्यालय पूरी तरह बंद रहे। इससे पहले, देहरादून के बसंत विहार स्थित उनके आवास पर सुबह से ही दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए वीआईपी और आम जनता का हुजूम जुटा रहा। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर नमन किया। उपराष्ट्रपति ने शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। इस दुखद घड़ी में दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी अरूणा खंडूड़ी, उनकी बेटी व उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूड़ी, बेटे मनीष खंडूड़ी सहित भाजपा के तमाम वरिष्ठ नेता और सैन्य अधिकारी मौजूद रहे। मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी का सोमवार सुबह 11:15 बजे देहरादून के मैक्स अस्पताल में निधन हो गया था। वे 92 वर्ष के थे और लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। सैनिक से राजनेता बने खंडूड़ी जी को उत्तराखंड की राजनीति में शुचिता और कड़े अनुशासन का प्रतीक माना जाता था। वे साल 2007 और फिर 2011 में दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे और सूबे को विकास की नई दिशा दी। उन्होंने गढ़वाल लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हुए केंद्रीय राजनीति में भी उत्तराखंड की आवाज को मजबूती से बुलंद किया था।मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि जनरल साहब का जाना उत्तराखंड और देश की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनका अनुशासित जीवन और राज्य के प्रति समर्पण हमेशा हमारा मार्गदर्शन करता रहेगा। पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ उनकी अंत्येष्टि की प्रक्रिया संपन्न की जा रही है।