हल्द्वानी के नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती किशोर की मौत! परिजनों ने लगाया मारपीट कर हत्या का आरोप, अकेली मां का अंतिम सहारा था मृतक
हल्द्वानी। हल्द्वानी के मुखानी क्षेत्र में संचालित एक नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती 17 वर्षीय किशोर शुभम सिंह अधिकारी की सुशीला तिवारी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने नशा मुक्ति केंद्र संचालक और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि किशोर के साथ मारपीट की गई, जिसके कारण उसकी हालत बिगड़ी और अंततः उसकी मौत हो गई। किशोर के सिर पर चोट के निशान मिलने से मामला और गंभीर हो गया है। परिजनों ने इसे सीधे तौर पर हत्या का मामला बताते हुए दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की है। जानकारी के अनुसार मुखानी निवासी जया अधिकारी ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि उनका पुत्र शुभम नशे की लत से जूझ रहा था। बेटे को इस आदत से छुटकारा दिलाने के उद्देश्य से उन्होंने 21 फरवरी को उसे लामाचौड़ स्थित हमारा संकल्प नशा मुक्ति समिति में भर्ती कराया था। परिवार को उम्मीद थी कि उपचार और निगरानी से शुभम की हालत में सुधार होगा, लेकिन कुछ ही समय बाद घटनाक्रम ने दुखद मोड़ ले लिया।
परिजनों का आरोप है कि 21 अप्रैल को जब शुभम की मां उससे मिलने केंद्र पहुंचीं तो उसकी हालत सामान्य थी और वह बातचीत भी कर रहा था। लेकिन इसके चार दिन बाद केंद्र प्रबंधन की ओर से फोन कर सूचना दी गई कि शुभम अचानक बेहोश हो गया है और उसे डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह सूचना मिलते ही परिवार अस्पताल पहुंचा, लेकिन वहां केंद्र का कोई जिम्मेदार व्यक्ति मौजूद नहीं मिला, जिससे परिजनों का शक और गहरा गया। 24 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती कराए गए शुभम की हालत बेहद नाजुक बताई गई। चिकित्सकीय जांच में उसके लीवर और किडनी पर गंभीर असर पाया गया। हालत बिगड़ने पर उसे तत्काल वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया, जहां कई दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद उसने दम तोड़ दिया। शुभम की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और परिजन अस्पताल परिसर में ही फूट-फूटकर रो पड़े। परिवार वालों का कहना है कि शुभम की हालत अचानक इस कदर बिगड़ना सामान्य नहीं हो सकता। उनका आरोप है कि केंद्र में उसके साथ मारपीट की गई और पर्याप्त देखरेख नहीं की गई। यही लापरवाही उसकी मौत की वजह बनी। सिर पर मिले चोट के निशानों ने इन आरोपों को और गंभीर बना दिया है। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने नशा मुक्ति केंद्र की जांच कराई। जांच में सामने आया कि संबंधित केंद्र बिना वैध पंजीकरण के संचालित किया जा रहा था। साथ ही किशोर की देखरेख और उपचार में गंभीर लापरवाही बरते जाने के भी संकेत मिले। जांच रिपोर्ट के आधार पर तीन मई को एसएसपी मंजूनाथ टीसी के निर्देश पर केंद्र संचालिका आयुषी कपिल के खिलाफ मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम-2017 की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शुक्रवार को पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे किशोर के चाचा गौरव बिष्ट ने केंद्र संचालिका की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई की गई होती तो शायद शुभम की जान बचाई जा सकती थी। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं स्वास्थ्य विभाग भी अवैध रूप से संचालित नशा मुक्ति केंद्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर ऐसे केंद्रों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।