ऊर्जा संरक्षण की अनूठी मिसाल: सूचना विभाग में अब हर शनिवार को 'नो व्हीकल डे', साइकिल चलाकर दफ्तर पहुंचे महानिदेशक बंशीधर तिवारी
देहरादून। ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में सूचना एवं लोक संपर्क विभाग ने एक बेहद अनुकरणीय और प्रेरक पहल की है। शासन से प्राप्त दिशा-निर्देशों के क्रम में विभाग में अब प्रत्येक शनिवार को अनिवार्य रूप से “नो व्हीकल डे” के रूप में मनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। इस नई व्यवस्था की शुरुआत करते हुए सूचना विभाग के महानिदेशक बंशीधर तिवारी खुद साइकिल चलाकर अपने दफ्तर पहुंचे, जिसे देखकर विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी बेहद प्रेरित नजर आए।
ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तराखंड सूचना एवं लोक संपर्क विभाग ने एक सराहनीय पहल शुरू की है। विभाग में अब प्रत्येक शनिवार को “नो व्हीकल डे” के रूप में मनाया जाएगा। इस अभियान की शुरुआत करते हुए सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी खुद साइकिल चलाकर कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों-कर्मचारियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। शासन से प्राप्त निर्देशों के क्रम में शुरू की गई इस पहल का मुख्य उद्देश्य ईंधन की बचत, कार्बन उत्सर्जन में कमी और ऊर्जा संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना है। महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की है कि वे प्रत्येक शनिवार को कार्यालय आने-जाने के लिए निजी वाहनों के बजाय साइकिल, सार्वजनिक परिवहन या अन्य वैकल्पिक साधनों का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े बदलाव ला सकते हैं। यदि हर व्यक्ति सप्ताह में एक दिन भी निजी वाहन का कम उपयोग करे, तो इससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ा योगदान मिलेगा। उन्होंने इसे राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण अभियान को मजबूत करने वाला कदम बताया। महानिदेशक की यह पहल कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बनी रही। विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी इस अभियान का समर्थन करते हुए भविष्य में साइकिल और सार्वजनिक परिवहन अपनाने की बात कही। लोगों का मानना है कि सरकारी विभागों की ऐसी पहल समाज में सकारात्मक संदेश देती है और आम जनता को भी पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाती है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन बचत और मितव्ययिता अपनाने की अपील तथा राज्य मंत्रिमंडल के फैसलों के अनुरूप लागू किया गया है। सरकार का मानना है कि यदि सरकारी संस्थानों में इस तरह की पहल सफल होती है, तो इसका असर समाज के अन्य वर्गों पर भी पड़ेगा।