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सब्जी बेचने वाले का बेटा आज रचेगा इतिहास! कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए मेडल की उम्मीद बने नालंदा के झंडू कुमार

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 24, 2026 08:07 AM
A vegetable vendor's son is set to make history today! Nalanda's Jhandu Kumar emerges as a medal hope for India at the Commonwealth Games.

नालंदा। कभी सड़क किनारे मां-बाप के साथ आलू-प्याज बेचने वाला एक बेटा आज दुनिया के सबसे बड़े खेल मंचों में से एक पर भारत के लिए इतिहास रचने उतरने वाला है। बिहार के नालंदा जिले के हरनौत निवासी पैरा-पावरलिफ्टर झंडू कुमार शुक्रवार देर रात स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित 23वें कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 72 किलोग्राम भार वर्ग की पैरा-पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में भारत के लिए पदक की चुनौती पेश करेंगे। उनकी सफलता की कामना में पूरे हरनौत, नालंदा और बिहार में दुआओं का दौर जारी है।

बिहार के खेल इतिहास में यह पहला अवसर है, जब राज्य का कोई पैरा-एथलीट कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहा है। झंडू कुमार का मुकाबला भारतीय समयानुसार शुक्रवार देर रात 12:30 बजे शुरू होगा। इस स्पर्धा में दुनिया के 17 शीर्ष पैरा-पावरलिफ्टर हिस्सा ले रहे हैं और रणनीति के अनुसार झंडू का मुकाबला सबसे अंत में रखा गया है, जिससे मुकाबले का रोमांच और बढ़ गया है। झंडू की कहानी संघर्ष, साहस और जज्बे की ऐसी मिसाल है, जो हर युवा के लिए प्रेरणा बन सकती है। हरनौत के सबनौह डीह गांव में जन्मे झंडू चार भाइयों और तीन बहनों में सबसे छोटे हैं। महज चार वर्ष की उम्र में पोलियो ने उनके शरीर के निचले हिस्से को प्रभावित कर दिया। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के सामने दो वक्त की रोटी जुटाना भी चुनौती था। पिता रामानंद पासवान और मां कमला देवी हरनौत बाजार में सड़क किनारे आलू-प्याज बेचकर परिवार का गुजारा करते हैं। गरीबी के कारण झंडू ने बचपन से ही परिवार का हाथ बंटाना शुरू कर दिया। वर्ष 2018 में वे खुद भी सब्जी बेचते थे। उनके पास व्हीलचेयर तक नहीं थी। कोरोना काल में उन्होंने एक टोटो (ई-रिक्शा) खरीदा। दिनभर टोटो चलाकर परिवार की मदद करते और शाम को जिम में घंटों पसीना बहाते। वर्ष 2023 में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए पैसों की कमी हुई तो उन्होंने अपना टोटो तक बेच दिया, लेकिन खेल का सपना नहीं छोड़ा। झंडू की प्रतिभा को निखारने में उनके मेंटर और जिम संचालक गौतम सिंह की अहम भूमिका रही। गौतम सिंह बताते हैं कि शुरुआती दिनों में जब वे झंडू को प्रतियोगिता में लेकर गए तो उनके नाम का मजाक उड़ाया गया। लेकिन जैसे ही झंडू ने शानदार प्रदर्शन किया, वही लोग खड़े होकर तालियां बजाने लगे। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। झंडू की उपलब्धियां लगातार बढ़ती गईं। वर्ष 2022 के कोलकाता नेशनल में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की। 2024 में नेशनल और खेलो इंडिया प्रतियोगिताओं में पदक हासिल किए। वर्ष 2025 उनके करियर का सबसे यादगार साल साबित हुआ, जब उन्होंने 206 किलोग्राम वजन उठाकर 1994 से कायम राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया। इसके बाद चीन में वर्ल्ड कप में कांस्य पदक, मिस्र में विश्व चैंपियनशिप में छठा स्थान और 2026 एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया। गौतम सिंह ने बताया कि भारत के वरिष्ठ कोच राजेंद्र सिंह रहेलू के मार्गदर्शन में झंडू पूरी तरह तैयार हैं और उनका लक्ष्य देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। उनके साथी खिलाड़ी और जिम के सदस्य भी देर रात मुकाबला देखने और उनकी जीत के लिए प्रार्थना करने की तैयारी कर रहे हैं। उधर, हरनौत में झंडू का परिवार आज भी टीन के शेड वाली झोपड़ी में किराये पर रहता है। पिता रामानंद पासवान आज भी सब्जी बेचकर परिवार चलाते हैं। बेटे की उपलब्धियों पर गर्व जताते हुए उन्होंने कहा कि खुशी इस बात की है कि बेटा देश के लिए खेल रहा है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई विशेष सहायता नहीं मिली। मां कमला देवी भावुक होकर बताती हैं कि झंडू बचपन में उनकी जगह खुद सब्जी बेचने बैठ जाता था और कहता था, "मां, आप आराम करो, मैं बेचता हूं।" उन्होंने सरकार से बेटे के लिए एक सरकारी नौकरी और रहने के लिए घर की मांग की है, ताकि वर्षों का संघर्ष समाप्त हो सके। झंडू की बड़ी भाभी बलियेश्वरी देवी भी अपने देवर के संघर्ष को याद कर भावुक हो जाती हैं। उनका कहना है कि गरीबी के बावजूद झंडू ने कभी हार नहीं मानी। रात में जैसे-तैसे सोते और सुबह-शाम जिम में अभ्यास करने निकल जाते थे। आज जब झंडू कुमार कॉमनवेल्थ गेम्स के मंच पर भारत के लिए पदक जीतने उतरेंगे, तब उनके साथ सिर्फ नालंदा या बिहार ही नहीं, बल्कि पूरा देश उनकी जीत की दुआ करेगा। यह मुकाबला केवल एक खिलाड़ी का नहीं, बल्कि उस संघर्ष, हौसले और सपनों का भी है जिसने विपरीत परिस्थितियों को मात देकर दुनिया के सबसे बड़े मंच तक अपनी पहचान बनाई है।


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