सिरका ओपनकास्ट माइंस में फूटा जल ज्वालामुखी! अचानक पाताल से निकला सैलाब, खदान जलमग्न
रामगढ़। झारखंड के रामगढ़ जिले से एक बेहद हैरान और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ सिरका खुली खदान (ओपनकास्ट माइंस) में रविवार शाम को अचानक जमीन के नीचे से इतनी भारी मात्रा में पानी निकलने लगा, मानो पाताल को फाड़कर कोई 'जल ज्वालामुखी' फूट पड़ा हो। पानी का वेग और बहाव इतना भयंकर था कि देखते ही देखते कुछ ही मिनटों में पूरी कोयला खदान एक विशाल झील में तब्दील हो गई और पूरा इलाका जलमग्न हो गया। राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि रविवार का दिन होने के कारण खदान में नियमित रूप से होने वाला भारी माइनिंग का काम बंद था, जिससे एक बहुत बड़ा और भयावह हादसा होने से टल गया। घटना की सूचना मिलते ही सिरका परियोजना के उच्च अधिकारी और सुरक्षा कर्मी तुरंत अलर्ट मोड पर आ गए। सिरका परियोजना के पदाधिकारी एएन सिंह ने मामले की तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती जांच में हादसे की असली वजह सामने आ गई है।
दरअसल, इस ओपनकास्ट खदान में जहां खनन कार्य चल रहा था, उसके ठीक नीचे या बगल में वर्षों पुरानी एक बंद पड़ी भूमिगत (अंडरग्राउंड) खदान की गैलरी थी। सालों से बंद होने के कारण उस गैलरी में लाखों गैलन पानी जमा था। रविवार शाम को माइनिंग के दबाव या किसी अन्य तकनीकी कारण से वह गैलरी अचानक प्रभावित होकर टूट गई, जिससे वहां जमा पानी पूरी ताकत के साथ ओपनकास्ट खदान में आ गया। जैसे ही पाताल से पानी का रिसाव शुरू हुआ, प्रबंधन ने तत्काल सुरक्षा मानकों के तहत सक्रियता दिखाई। अधिकारियों के निर्देश पर खदान के भीतर पानी निकालने के लिए पहले से लगी मोटरों और अन्य महंगे उपकरणों को आनन-फानन में सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया। इसके अलावा, उत्पादन कार्य में लगी करोड़ों रुपये की भारी मशीनों, डंपरों और वाहनों को भी पानी के डूब क्षेत्र से पहले ही बाहर निकाल लिया गया था। गनीमत यह रही कि इस पूरे घटनाक्रम में कोई भी मजदूर या कर्मचारी हताहत नहीं हुआ है और किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है। अचानक हुई इस अद्भुत लेकिन खतरनाक घटना को देखने के लिए खदान के चारों तरफ स्थानीय ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई थी, जिसे नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। परियोजना पदाधिकारी एएन सिंह के मुताबिक, सुरक्षा कारणों से खदान में कोयला उत्पादन को अस्थायी रूप से पूरी तरह रोक दिया गया है। खदान में भरे इस अथाह पानी को बाहर निकालने के लिए भारी क्षमता वाले पंपों को काम पर लगाया गया है और जल निकासी का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। प्रबंधन का कहना है कि जब तक खदान से पूरा पानी नहीं निकल जाता और सुरक्षा विशेषज्ञ पूरे एरिया की दोबारा जांच नहीं कर लेते, तब तक माइनिंग का काम शुरू नहीं किया जाएगा। फिलहाल पूरी स्थिति पर पल-पल की निगरानी रखी जा रही है।