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पटना के युवा ने रचा टेक्नोलॉजी का इतिहास, बिना बड़ी फंडिंग और कॉर्पोरेट सपोर्ट के बनाया शक्तिशाली AI मॉडल, अब वैश्विक AI जगत में हो रही चर्चा

editor
  • Awaaz Desk
  • May 09, 2026 09:05 AM
A young man from Patna has created technological history, building a powerful AI model without significant funding or corporate support, and it's now gaining attention across the global AI landscape.

पटना। बिहार के एक 19 वर्षीय युवक ने अपनी मेहनत, लगन और तकनीक के प्रति जुनून के दम पर ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसकी चर्चा अब देश ही नहीं बल्कि वैश्विक टेक जगत में भी हो रही है। मध्यवर्गीय परिवार से आने वाले आनंद ने बिना किसी बड़ी फंडिंग या कॉर्पोरेट सपोर्ट के अपनी बचत और सीमित संसाधनों के दम पर एक शक्तिशाली मल्टीमॉडल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल तैयार किया है। इंटरनेट पर इस उपलब्धि को लेकर जबरदस्त चर्चा है और कई लोग इसकी तुलना सीधे दुनिया की दिग्गज AI कंपनियों Google और OpenAI से कर रहे हैं।

आनंद का दावा है कि उनका विकसित किया गया यह AI मॉडल 512x512 रेजोल्यूशन की इमेज जेनरेशन करने में सक्षम है और 24kHz की हाई-क्वालिटी स्पीच आउटपुट भी दे सकता है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इतने उन्नत मल्टीमॉडल सिस्टम को विकसित करने के लिए आमतौर पर बड़ी टेक कंपनियों के पास मौजूद अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, विशाल कंप्यूटिंग क्षमता और करोड़ों डॉलर के निवेश की जरूरत होती है। लेकिन आनंद ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो सीमित संसाधन भी बड़ी उपलब्धियों की राह नहीं रोक सकते।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आनंद के इस मल्टीमॉडल सिस्टम ने निजी परीक्षणों के दौरान OmniDocBench V1.5 पर 93.45 का प्रभावशाली स्कोर हासिल किया है। यह स्कोर इस बात का संकेत माना जा रहा है कि मॉडल जटिल डॉक्यूमेंट प्रोसेसिंग और मल्टीमॉडल टास्क को कुशलता से संभाल सकता है। इससे पहले भी आनंद अपने लैपटॉप पर टेक्स्ट-टू-वीडियो सिस्टम ट्रेन कर चुके हैं, जिसने तकनीकी समुदाय का ध्यान उनकी ओर खींचा था।

आनंद का परिवार एक साधारण मध्यवर्गीय परिवार है। उनके पिता सरकारी अधिकारी हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। इस पूरे प्रोजेक्ट को तैयार करने में परिवार ने आर्थिक सहयोग दिया और सिर्फ GPU कंप्यूटिंग पर ही करीब 64 हजार रुपये खर्च हुए। एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए यह रकम कम नहीं होती, लेकिन बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए परिवार ने हरसंभव सहयोग दिया। आनंद बताते हैं कि उन्होंने अपनी व्यक्तिगत बचत और RunPod ग्रांट्स की मदद से इस प्रोजेक्ट को अंजाम तक पहुंचाया।

आनंद का मानना है कि जैसे पश्चिमी देश और चीन अपने-अपने AI मॉडल विकसित कर रहे हैं, वैसे ही भारत को भी अपनी तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए खुद का शक्तिशाली AI इकोसिस्टम तैयार करना चाहिए। उनका कहना है कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश को विदेशी तकनीकों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि देश के युवाओं को अपनी क्षमताओं के दम पर वैश्विक AI परिदृश्य में जगह बनानी चाहिए।

आनंद के इस दावे और उपलब्धि ने इंटरनेट और सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। बड़ी संख्या में लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं और इसे बिहार ही नहीं बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व की बात बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने लिखा कि बिहार जैसे राज्य से एक युवा का अकेले इतने बड़े स्तर का AI मॉडल तैयार करना असाधारण उपलब्धि है। हालांकि कुछ लोगों ने इस मॉडल की वास्तविक क्षमता और उपयोगिता पर सवाल भी उठाए हैं। कुछ यूजर्स का मानना है कि यह संभवतः AI-जनरेटेड कोड या तथाकथित “वाइब कोडिंग” का परिणाम हो सकता है। लेकिन इन तमाम आलोचनाओं के बावजूद आनंद अपने काम और लक्ष्य को लेकर पूरी तरह आत्मविश्वास से भरे हुए हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, आनंद अब अपने मॉडल के वेट्स को Hugging Face पर रिलीज करने की तैयारी कर रहे हैं और भविष्य में पूरे कोडबेस को GitHub पर ओपन सोर्स करने की योजना है। उनका मानना है कि ओपन सोर्स के जरिए भारत के हजारों युवा डेवलपर्स इस मॉडल को और बेहतर बना सकेंगे और देश में AI नवाचार को नई गति मिलेगी।

फिलहाल आनंद इस प्रोजेक्ट को अगले स्तर तक ले जाने के लिए 35 हजार डॉलर की फंडिंग की तलाश में हैं। उनका सपना सिर्फ एक AI मॉडल बनाना नहीं, बल्कि भारत को वैश्विक AI मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करना है। बिहार की धरती से निकला यह युवा आज यह संदेश दे रहा है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। अगर संकल्प मजबूत हो तो सीमित साधनों में भी दुनिया को चौंकाने वाले काम किए जा सकते हैं।


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