डेढ़ दशक पुराने फर्जी पासपोर्ट मामले में आचार्य बालकृष्ण बरी, देहरादून सीबीआई कोर्ट का बड़ा फैसला
देहरादून। बाबा रामदेव के करीबी सहयोगी और पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने के बहुचर्चित और करीब डेढ़ दशक पुराने मामले में देहरादून की विशेष सीबीआई अदालत ने सोमवार को बरी कर दिया है। तृतीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने मामले की अंतिम सुनवाई पूरी करते हुए आचार्य बालकृष्ण को सभी आरोपों से मुक्त करने का फैसला सुनाया।
पतंजलि योगपीठ के महामंत्री और योगगुरु बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण को फर्जी पासपोर्ट और दस्तावेजों से जुड़े करीब डेढ़ दशक पुराने मामले में बड़ी राहत मिली है। देहरादून स्थित सीबीआई अदालत ने मामले में फैसला सुनाते हुए आचार्य बालकृष्ण को बरी कर दिया। यह मामला कथित फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के आरोपों से जुड़ा था। मामले की सुनवाई तृतीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में हुई। सीबीआई की जांच के अनुसार, आचार्य बालकृष्ण पर आरोप था कि उन्होंने पासपोर्ट बनवाने के लिए बरेली स्थित पासपोर्ट कार्यालय में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के खुर्जा स्थित एक संस्कृत महाविद्यालय से जुड़े कथित शैक्षणिक प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए थे। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि इन दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट हासिल किया गया। सीबीआई के मुताबिक, जांच के दौरान सामने आया था कि आचार्य बालकृष्ण ने वर्ष 1997 में खुर्जा स्थित श्री राधा कृष्ण संस्कृत महाविद्यालय से कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र हासिल किए थे। इस मामले में महाविद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य प्रोफेसर नरेश द्विवेदी को भी सह-आरोपित बनाया गया था। जांच एजेंसी का दावा था कि प्राचार्य की ओर से बालकृष्ण को प्रमाण पत्र उपलब्ध कराए गए थे। इन्हीं कथित दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने को लेकर सीबीआई ने आपराधिक धाराओं के साथ पासपोर्ट अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया था। मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया के दौरान आचार्य बालकृष्ण की गिरफ्तारी भी हुई थी। फर्जी पासपोर्ट से जुड़ा यह मामला लंबे समय से अदालत में विचाराधीन था। करीब डेढ़ दशक तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद सोमवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाया। अदालत के फैसले से आचार्य बालकृष्ण को बड़ी राहत मिली है। आचार्य बालकृष्ण पतंजलि योगपीठ से लंबे समय से जुड़े हैं और बाबा रामदेव के प्रमुख सहयोगियों में माने जाते हैं। ऐसे में उनके खिलाफ चल रहे इस पुराने मामले पर अदालत के फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस मामले में सीबीआई की ओर से लगाए गए आरोप फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्रों और उनके आधार पर पासपोर्ट हासिल करने से संबंधित थे। हालांकि, अदालत ने सुनवाई के बाद आचार्य बालकृष्ण को मामले में बरी कर दिया। इसके साथ ही लंबे समय से चल रहे इस प्रकरण में उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई पर फिलहाल विराम लग गया है। देहरादून कोर्ट के इस फैसले के बाद पतंजलि योगपीठ और आचार्य बालकृष्ण से जुड़े इस पुराने मामले की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। करीब 15 वर्ष से अधिक समय से चले आ रहे प्रकरण में अदालत का फैसला अब मामले की कानूनी दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।