अग्निवीरों की हुंकार: 24 सप्ताह की कठिन ट्रेनिंग के बाद 1121 जांबाज भारतीय सेना में शामिल
रामगढ़। रामगढ़ छावनी स्थित पंजाब रेजिमेंटल सेंटर का ऐतिहासिक किलाहरी ग्राउंड आज गर्व, अटूट उत्साह और देशभक्ति के अनूठे रंग में सराबोर नजर आया। मौका था अग्निवीर बैच-VII की भव्य पासिंग आउट परेड का, जहां 24 हफ्तों के कड़े शारीरिक, मानसिक और सैन्य प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा कर 1121 अग्निवीर रंगरूटों ने देश सेवा की शपथ ली। 'अंतिम पग' पार करते ही ये सभी जांबाज औपचारिक रूप से भारतीय सेना का अभिन्न अंग बन गए।
इस गौरवमयी परेड की समीक्षा पंजाब रेजिमेंटल सेंटर के कमांडेंट ब्रिगेडियर सजेश बाबू पीजी ने की। परेड के दौरान नव-प्रशिक्षित अग्निवीरों के शानदार तालमेल, कड़े अनुशासन और गगनभेदी जयघोष ने वहां मौजूद सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, प्रशिक्षकों और अभिभावकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अपने पराक्रम के लिए विख्यात पंजाब रेजिमेंट की ऐतिहासिक परंपरा को अब ये युवा सैनिक आगे बढ़ाएंगे। इन अग्निवीरों को भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए बेहद आधुनिक स्तर पर तैयार किया गया है। 24 हफ्तों के कठिन दौर में इन्हें शारीरिक दक्षता और सामरिक युद्धाभ्यास के साथ-साथ आधुनिक हथियारों को चलाने, ड्रोन संचालन, कंप्यूटर शिक्षा, तकनीकी उपकरणों के उपयोग और व्यक्तित्व विकास की बारीकियां सिखाई गई हैं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अग्निवीरों को समारोह में विशेष पुरस्कारों से नवाजा गया। समारोह का सबसे भावुक और यादगार पल वह था, जब देश सेवा के लिए अपने बेटों को समर्पित करने वाले माता-पिता को पारंपरिक 'गौरव पदक' से सम्मानित किया गया। पदक सीने पर सजते ही कई पिताओं और माताओं की आंखें खुशी से छलक उठीं। कमांडेंट ब्रिगेडियर सजेश बाबू पीजी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रशिक्षण के दौरान इन जवानों में कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता जैसे मूल्यों को कूट-कूट कर भरा गया है। अंत में, भारतीय संविधान और वर्दी के सम्मान की शपथ लेकर ये अग्निवीर देश की आन, बान और शान की रक्षा के लिए सेना की विभिन्न इकाइयों में तैनाती के लिए रवाना हो गए।