समस्तीपुर के सरकारी स्कूलों में एआई का कमाल,बिना इंटरनेट 'पढ़ाई' ऐप से स्मार्ट बनेंगे बच्चे
समस्तीपुर। बिहार के सरकारी स्कूलों की सूरत और सीरत अब बदलने वाली है। समस्तीपुर जिले के सरकारी विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई अब सिर्फ पारंपरिक किताबों, कॉपियों और क्लासरूम की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहेगी। जिले में शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए एक अनूठी पहल की शुरुआत की गई है। अब बच्चे मोबाइल आधारित 'पढ़ाई' ऐप के जरिये घर बैठे, वह भी बिना इंटरनेट (ऑफलाइन) के, भाषा और गणित की बुनियादी समझ को बेहद मजेदार तरीके से विकसित कर सकेंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित यह ऐप बच्चों के सीखने की गति के अनुसार खुद को ढाल लेगा।
शिक्षा विभाग ने इस आधुनिक व्यवस्था को अमलीजामा पहनाने के लिए 'प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन' के साथ हाथ मिलाया है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत जिले के ताजपुर और मोरवा प्रखंड के चयनित सरकारी विद्यालयों में 'टेक्नोलॉजी इन टीचिंग एट द राइट लेवल' कार्यक्रम को हरी झंडी दे दी गई है। यह पूरा प्रोजेक्ट मार्च 2027 तक संचालित किया जाएगा। इस विशेष पहल में प्राथमिक स्तर के यानी कक्षा तीन से लेकर पांचवीं तक के बच्चों को शामिल किया गया है, ताकि उनका बेस (नींव) मजबूत किया जा सके। इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत इसका एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) आधारित होना है। हर बच्चे की सीखने की क्षमता अलग होती है,कोई जल्दी सीखता है तो किसी को समय लगता है। 'पढ़ाई' ऐप बच्चों के प्रदर्शन का रियल-टाइम (वास्तविक समय) में विश्लेषण करेगा। बच्चा ऐप के सामने किसी पाठ को पढ़ेगा, तो ऐप उसकी आवाज को रिकॉर्ड कर उसके उच्चारण, पढ़ने की रफ्तार और होने वाली गलतियों का बारीकी से विश्लेषण करेगा। ऐप में 'असर' टूल पर आधारित गणितीय मूल्यांकन को भी जोड़ा गया है। इससे बच्चों की बुनियादी भाषा और अंकगणित की समझ को मजबूती मिलेगी। ऐप से मिलने वाले डेटा से शिक्षकों को यह समझने में आसानी होगी कि किस बच्चे को किस विषय में अधिक सहायता की जरूरत है, जिससे वे क्लास में उसी अनुसार मार्गदर्शन दे सकेंगे। अक्सर ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की सुचारू उपलब्धता एक बड़ी समस्या होती है। इस ऐप को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे चलाने के लिए हर समय इंटरनेट की जरूरत नहीं होगी। शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि यह ऐप स्कूल की पढ़ाई का विकल्प नहीं है, बल्कि बच्चों को स्कूल के बाद अतिरिक्त अभ्यास का अवसर देने का एक जरिया है। इससे उन गरीब बच्चों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जिन्हें स्कूल के बाद घर पर कोई ट्यूशन या शैक्षणिक सहयोग नहीं मिल पाता। अब अभिभावक भी अपने बच्चों की वास्तविक प्रगति को मोबाइल पर देख सकेंगे।