राम सेतु के जरिये अक्षय करेंगे डूबती नैया को पार लगाने का प्रयास
फिल्म 'राम सेतु' की कहानी को आसान भाषा में बयां किया जाए तो इस पर है कि क्या तमिलनाडु और श्रीलंका के बीच बने हुए राम सेतु को प्रभु श्रीराम ने बनाया या फिर ये प्रकृति का कोई करिश्मा है। साथ ही ये एक ऐसा विषय था कि देश के राष्ट्रवादी माहौल में इसे संवेदनशील माना जा सकता है, ऐसे में जबकि थिएटर्स में लोग आने को तैयार नहीं है। बता दे कि अपनी पिछली हिट फिल्म ‘सूर्यवंशी’ के बाद से अभिनेता अक्षय कुमार को बॉक्स ऑफिस पर कोई गुड न्यूज मिली भी नहीं है। ‘सूर्यवंशी’ से ठीक पहले टिकट खिड़की पर एक फ्लॉप फिल्म ‘बेलबॉटम’ और ‘सूर्यवंशी’ के बाद लगातार तीन फ्लॉप फिल्में होली पर रिलीज हुई ‘बच्चन पांडे’, उसके बाद आई ‘सम्राट पृथ्वीराज’ और फिर राखी पर रिलीज हुई ‘रक्षाबंधन’ दे चुके अक्षय कुमार की हिंदी सिनेमा में ब्रांड वैल्यू को बनाए रखने का इस साल का आखिरी पुल है, फिल्म ‘राम सेतु है।
क्या है राम सेतु की कहानी
फिल्म के शीर्षक और ट्रेलर ने पहले ही इस बात को जाहिर कर दिया है कि राम सेतु की कहानी क्या है. एक शिपिंग कंपनी राम सेतु को तोड़ने की याचिका कोर्ट में दायर करती है, ताकि उस जगह का इस्तेमाल ट्रांसपोर्ट को बेहतर बनाने के लिए किया जा सके. राम सेतु इसे हिन्दू आस्था के प्रतीक श्रीराम ने बनाया है या फिर प्रकृति ने. इसी खोज की जिम्मेदारी आर्कोलॉजिस्ट आर्यन कुलश्रेष्ठ (अक्षय कुमार) को मिलती है. आर्यन नास्तिक है. श्रीराम के अस्तित्व पर भी यह फिल्म सवाल उठाती है और बाद में इसका जवाब भी देती है. यह एक नास्तिक आर्कोलॉजिस्ट के आस्तिक बनने की भी कहानी है. परदे पर जो कुछ भी घट रहा है, वो पूरी तरह से प्रेडिक्टेबल है. जिस वजह से फिल्म आपको एंगेज नहीं कर पाती है. आपको पता होता है कि परदे पर कब क्या घटने वाला है. फिल्म का सेकेंड हाफ इसके सीजीआई की तरह ही कमजोर है. मुख्य प्लॉट पर आने से पहले शुरुआत में कहानी आर्यन यानी अक्षय कुमार के हीरोइज्म को दर्शाने के लिए अफगानिस्तान में घूमती है. जिससे फिल्म के मुख्य प्लॉट का कुछ लेना-देना नहीं होता है. हां वह सीक्वेंस अक्षय कुमार की याद दिलाने वाले हॉलीवुड एक्टर निकोलस केज की फिल्म नेशनल ट्रेजर की जरूर याद दिला जाता है.
कैसी है कास्ट की एक्टिंग
अक्षय, जैकलीन, नासिर, नुसरत कमाल के एक्टर्स हैं तो उनकी एक्टिंग जैसी है, वो वैसी है, हमेशा जैसी होती आई है, डायरेक्शन, सिनेमेटोग्राफी, एक्शन और रिसर्च भी बेहतरीन हैं. क्लाइमैक्स में डायलॉग्स और इमोशन्स का काफी रोल है. रिसर्च और डायलॉग्स में उनकी पिछली मूवी के डायरेक्टर चंद्र प्रकाश द्विवेदी का अहम रोल है. इस मूवी में वो क्रिएटिव डायरेक्टर हैं.
इन बातों ने नहीं किया इम्प्रेस
हां, इस मूवी से ये साफ पता चलता है कि मूवी की बड़ी कहानी डायरेक्टर के पास नहीं थी, तभी शुरुआत एक बड़े सीन से हुई जो बामियान में बुद्ध की मूर्ति के सामने फिल्माया गया और इमोशंस के लिए उसमें सिंध के राजा दाहिर को जोड़ा गया. इसी तरह इंटरवल के बाद जिस तरह से श्रीलंका में सुरंगें और रावण में इलाके में भागमभाग दिखाई गई, उससे साफ लगा कि डायरेक्टर थोड़ा कंफ्यूज है, जिसकी भरपाई क्लाइमैक्स में एपी के कैरेक्टर और अदालती बहस में इमोशन्स से करने की कोशिश डायरेक्टर ने की है.
हालांकि इस मूवी को साइंटिफिक बनाने की कोशिश की गई और नासा के साइंस चैनल पर आए 2017 के शो की रिसर्च का सहारा साफ दिखा तो उसकी रिपोर्ट को भी जिक्र करते तो और ज्यादा प्रभाव पड़ता. कुल मिलाकर राम भक्तों को ये मूवी पसंद आ सकती है और अक्षय की डूबती नैया भी रामसेतु के किनारे लगा सकती है.