बिहार में कोरोना की दस्तक से हड़कंप: बुजुर्ग के बाद बेटी भी संक्रमित, मायागंज अस्पताल में भर्ती,स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
भागलपुर। बिहार के भागलपुर जिले में कोरोना संक्रमण का दूसरा मामला सामने आते ही हड़कंप मच गया है। तिलकामांझी थाना क्षेत्र अंतर्गत हटिया रोड निवासी 65 वर्षीय बुजुर्ग की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद, अब उनकी देखभाल कर रही 30 वर्षीय बेटी की जांच रिपोर्ट भी पॉजिटिव पाई गई है। अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने दोनों मामलों की पुष्टि करते हुए तुरंत अलर्ट जारी कर दिया है।
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, संक्रमित बुजुर्ग (मूल निवासी बांका जिला) और उनकी बेटी दोनों को भागलपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय (मायागंज अस्पताल) के विशेष कोविड वार्ड में भर्ती कराया गया है। अस्पताल की रिपोर्ट के मुताबिक, बुजुर्ग कुछ दिनों से अपनी बेटी के घर भागलपुर में रह रहे थे। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें एक निजी क्लिनिक में भर्ती कराया गया, जहां 16 जुलाई को ली गई आरटी-पीसीआर जांच की रिपोर्ट 18 जुलाई को पॉजिटिव आई। वहीं, अपने पिता की लगातार देखभाल कर रही बेटी में भी सर्दी-खांसी के लक्षण दिखने पर 20 जुलाई को जांच कराई गई, जिसमें उनके भी संक्रमित होने की पुष्टि हुई। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संदीप लाल ने बताया, "दोनों मरीजों की स्थिति पूरी तरह से सामान्य और स्थिर है। घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। आम जनता से अपील है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आधिकारिक जानकारियों पर ही भरोसा करें। संक्रमण की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम अब उन सभी लोगों की पहचान में जुट गई है जो पिछले कुछ दिनों में बुजुर्ग या उनकी बेटी के संपर्क में आए थे। संदिग्ध लक्षण वाले लोगों की तुरंत आरटी-पीसीआर जांच कराई जाएगी ताकि वायरस के फैलाव को समय रहते रोका जा सके। मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. राजकमल चौधरी ने बताया कि मरीजों का इलाज निर्धारित कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार चल रहा है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। संक्रमण के प्रसार को रोकने और जनता को जागरूक करने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने विस्तृत दिशानिर्देश (जारी किए हैं। नियमित रूप से मास्क पहनें, हाथों को सैनिटाइज करें और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें। यदि सर्दी, खांसी, बुखार, गले में खराश या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण बने रहें, तो तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल या सीएचसी में डॉक्टर से परामर्श लें। यदि किसी मरीज का ऑक्सीजन सैचुरेशन 90 प्रतिशत या उससे नीचे आता है, तो इसे गंभीर मानते हुए बिना देरी के तुरंत अस्पताल में भर्ती हों। जिन लोगों की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव है लेकिन कोई लक्षण नहीं हैं, वे डॉक्टरी सलाह के अनुसार घर में होम क्वारंटीन रहें। स्वास्थ्य विभाग ने दोहराया है कि घबराहट की कोई जरूरत नहीं है; सही समय पर जांच, सतर्कता और बचाव के नियमों का पालन ही इस संक्रमण से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।