मानसून से पहले मसूरी-देहरादून मार्ग पर 'अलर्ट':संवेदनशील पानी वाली बैंड पर ढहा भारी पुश्ता,मलबे के साथ फिर लौटा भूस्खलन का खौफ
देहरादून। पहाड़ों की रानी मसूरी को राजधानी से जोड़ने वाले मुख्य हाईवे पर मानसून की दस्तक से ठीक पहले सुरक्षा दावों की पोल खुल गई है। मसूरी-देहरादून मार्ग के सबसे संवेदनशील और डेंजर ज़ोन माने जाने वाले 'पानी वाली बैंड' क्षेत्र में शुक्रवार दोपहर करीब तीन बजे एक विशालकाय रिटेनिंग वॉल (पुश्ता) अचानक ताश के पत्तों की तरह भरभराकर जमींदोज हो गया।
पुश्ता गिरने की यह घटना इतनी भयानक थी कि जोरदार धमाके की आवाज सुनकर आसपास के दुकानदार और राहगीर सहम गए। इस हादसे का एक लाइव वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने लोक निर्माण विभाग और स्थानीय प्रशासन की रातों की नींद उड़ा दी है। बताया जा रहा है कि यह पुश्ता एक स्थानीय भू-स्वामी द्वारा अपनी भूमि को सुरक्षित करने के लिए सड़क से बिल्कुल सटाकर बनाया गया था। इस घटना ने स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों के जेहन में पिछले साल की भयावह यादें ताजा कर दी हैं। गौरतलब है कि 16 सितंबर 2025 को आई भीषण प्राकृतिक आपदा के दौरान यही पानी वाली बैंड क्षेत्र सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ था। तब मुख्य हाईवे का एक बड़ा हिस्सा धंस गया था और कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान मलबे की चपेट में आ गए थे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भूस्खलन की दृष्टि से इस अति-संवेदनशील क्षेत्र में निर्माण मानकों की सरेआम अनदेखी की जा रही है। मानसून सिर पर है, ऐसे में पुश्ता गिरने के बाद अब इस पूरे पहाड़ी हिस्से पर दोबारा बड़ा लैंडस्लाइड (भूस्खलन) होने का खतरा कई गुना बढ़ गया है। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। जागरूक नागरिकों ने लोक निर्माण विभाग, वन विभाग और जिला प्रशासन से इस घटिया निर्माण कार्य की गुणवत्ता की तत्काल उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर समय रहते इस ढहे हुए मलबे को नहीं हटाया गया और पहाड़ी को नीचे से सुरक्षा नहीं दी गई, तो आगामी भारी बारिश के दौरान मसूरी-देहरादून मार्ग हफ्तों के लिए बंद हो सकता है, जिससे न केवल पर्यटन प्रभावित होगा बल्कि कोई बड़ी जनहानि भी हो सकती है। फिलहाल, प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से मौके पर सतर्कता बढ़ा दी है।