पश्चिम एशिया संकट पर नई दिल्ली में सर्वदलीय बैठक: राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में जुटे दिग्गज, विदेश सचिव ने दी प्रस्तुति
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में गहराते तनाव और युद्ध जैसे हालातों के बीच केंद्र सरकार ने बुधवार शाम नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में सरकार ने विपक्षी दलों को क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, वहां फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और भारत के रणनीतिक हितों पर विस्तार से जानकारी दी।
बैठक में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति के सभी प्रमुख सदस्य शामिल हुए। गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकार का प्रतिनिधित्व किया। इनके अलावा स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भी चर्चा का हिस्सा बने। बैठक का मुख्य आकर्षण विदेश सचिव विक्रम मिस्री द्वारा दी गई विस्तृत प्रस्तुति रही, जिसमें उन्होंने पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों और भारत पर पड़ने वाले इसके कूटनीतिक व आर्थिक प्रभावों का खाका पेश किया। बैठक में विपक्षी दलों की ओर से कांग्रेस के तारिक अनवर व मुकुल वासनिक, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव और बीजद के सस्मित पात्रा शामिल हुए। वहीं, सत्ता पक्ष के सहयोगी दल जेडीयू से ललन सिंह और संजय झा ने शिरकत की। सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस ने इस बैठक से दूरी बनाई और राहुल गांधी भी इसमें शामिल नहीं हुए। सरकार ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच वहां रह रहे लाखों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। कूटनीतिक स्तर पर भारत की क्या रणनीति है और वैश्विक तेल आपूर्ति व अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित असर से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, इस पर भी चर्चा हुई। सरकार का उद्देश्य इस संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर लाकर राष्ट्रीय एकजुटता प्रदर्शित करना है। अधिकारियों के अनुसार, सरकार स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए आवश्यक प्रोटोकॉल तैयार रखे गए हैं।