यमुनोत्री धाम में श्रद्धा की 'छप्परफाड़' बरसात: कपाट खुलते ही मंदिर समिति की आय 23.5 लाख पार, खुला दान पात्र
विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के आगाज के साथ ही उत्तराखंड के यमुनोत्री धाम में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। देश-विदेश से पहुंच रहे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ का सीधा असर अब यमुनोत्री मंदिर समिति की आय पर भी साफ दिखाई देने लगा है। यात्रा शुरू होने के बाद बीते गुरुवार को यमुनोत्री धाम मंदिर परिसर में स्थापित मुख्य दान पात्र (हुंडी) को भारी सुरक्षा और पूरी पारदर्शिता के बीच खोला गया, जिसमें से नोटों की गड्डियां और सिक्कों की शक्ल में श्रद्धा का बड़ा खजाना निकला है।
मंदिर समिति से मिली जानकारी के अनुसार, दान पात्र को खोलने की प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी और सुरक्षित रखा गया था। इसे मंदिर समिति के पदाधिकारियों, तीर्थ पुरोहित समाज, राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों की संयुक्त मौजूदगी में खोला गया। इसके बाद सभी के सामने दान में मिली धनराशि की विस्तृत गणना (काउंटिंग) की गई। अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर बीते 19 अप्रैल को यमुनोत्री धाम के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले गए थे। कपाट खुलने के बाद से लेकर अब तक (यानी मात्र 32 दिनों के भीतर) मंदिर समिति को कुल 23.5 लाख रुपये की रिकॉर्ड आय प्राप्त हुई है। मंदिर परिसर में रखे दान पात्र से लगभग 15.5 लाख रुपये की नकद धनराशि निकली है। इसके अलावा मंदिर समिति की आधिकारिक रसीद बुक और विशेष पूजा के माध्यम से करीब 7.5 लाख रुपये का राजस्व दर्ज किया गया है। केवल एक महीने के भीतर लगभग 3.25 लाख (सवा तीन लाख) से अधिक श्रद्धालु मां यमुना के चौखट पर शीश नवा चुके हैं। यात्रियों की इस रिकॉर्ड आमद से यात्रा मार्ग के होटल व्यवसायी, घोड़ा-खच्चर संचालक, ढाबा मालिक और स्थानीय छोटे व्यापारी बेहद उत्साहित हैं। एक तरफ जहां भारी भीड़ से पूरा क्षेत्र रौनक से गुलजार है, वहीं दूसरी तरफ मंदिर समिति और पुरोहित समाज ने कुछ बुनियादी चिंताओं को भी रेखांकित किया है। मंदिर समिति के प्रवक्ता पुरुषोत्तम उनियाल और पुरोहित समाज के मनमोहन उनियाल ने बताया कि धाम में भौगोलिक और व्यवस्थागत चुनौतियों के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हो रहा है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि यदि यमुनोत्री धाम में तीर्थयात्रियों के लिए मूलभूत सुविधाओं (जैसे पैदल मार्ग, पेयजल और शेड्स) का और अधिक विस्तार किया जाए तथा यात्रा प्रबंधन को अधिक सुविधाजनक बनाया जाए, तो यहां आने वाले यात्रियों की संख्या और मंदिर समिति की आय में कई गुना अधिक वृद्धि हो सकती है।