अंकिता भंडारी हत्याकांड: सांसद डिंपल यादव की सीएम धामी को चिट्ठी,सीबीआई जांच और न्याय में तेजी लाने की मांग
देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय मिलने में हो रही देरी को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मैनपुरी से लोकसभा सांसद डिंपल यादव ने इस मुद्दे पर मुखर होते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक बेहद महत्वपूर्ण पत्र लिखा है। डिंपल यादव ने पत्र के जरिए मामले की न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने, सीबीआई जांच को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने और दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए राज्य सरकार से प्रभावी कदम उठाने की पुरजोर मांग की है।
सांसद डिंपल यादव ने मुख्यमंत्री को लिखे अपने पत्र में बताया कि हाल ही में उनकी बातचीत दिवंगत अंकिता भंडारी के पीड़ित परिवार से हुई है। घटना के इतने साल बीत जाने के बाद भी परिवार आज अपनी बेटी को इंसाफ मिलने की राह देख रहा है। अंकिता की निर्मम हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था। तब सरकार ने दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई का भरोसा दिया था, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया की धीमी रफ्तार चिंताजनक है। पीड़ित परिवार ने आशंका जताई है कि इस जघन्य अपराध के पीछे कुछ बेहद प्रभावशाली लोगों की भूमिका हो सकती है, जिनकी जांच फिलहाल सीबीआई कर रही है। परिवार की मांग है कि जांच और अदालती प्रक्रिया को एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरा कर सभी तथ्यों को देश के सामने लाया जाए, ताकि किसी भी दोषी को सियासी या प्रशासनिक संरक्षण न मिल सके। डिंपल यादव ने सीएम धामी से अनुरोध किया कि उत्तराखंड में महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास बहाल रखने के लिए अंकिता भंडारी जैसे संवेदनशील मामलों का त्वरित निस्तारण होना बेहद जरूरी है। उन्होंने साफ कहा कि जब तक वीभत्स कांड के दोषियों को उनके किए की सजा नहीं मिलती, तब तक पीड़ित परिवार और समाज की पीड़ा कम नहीं हो सकती। गौरतलब है कि सितंबर 2022 में पौड़ी जिले के यमकेश्वर क्षेत्र में स्थित एक निजी रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद पूरे उत्तराखंड की सड़कों पर व्यापक जनाक्रोश और आंदोलन देखने को मिला था। पुलिस ने मामले में रिसॉर्ट संचालक समेत तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। वर्तमान में इस मामले की जांच और कानूनी सुनवाई के विभिन्न पहलुओं पर देश भर की निगाहें टिकी हुई हैं।