अयोध्याः भाजपा नेता पर 2 लाख हड़पने का आरोप! परमहंस आचार्य की शिकायत पर FIR, सच्चिदानंद पांडेय ने आरोपों को बताया राजनीतिक साजिश
अयोध्या। अयोध्या की राजनीति और धर्म जगत से जुड़ा एक चर्चित मामला सामने आया है। भाजपा नेता सच्चिदानंद पांडेय के खिलाफ जगद्गुरु परमहंस आचार्य की शिकायत पर कोतवाली अयोध्या में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है। आरोप है कि भाजपा नेता सच्चिदानंद पांडेय ने पारिवारिक जरूरत और परिजनों की बीमारी का हवाला देकर जगद्गुरु परमहंस आचार्य से 2 लाख की रकम 10 से 12 दिनों के लिए उधार ली थी, लेकिन दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद रकम वापस नहीं की। इसी को लेकर परमहंस आचार्य ने पहले क्षेत्राधिकारी अयोध्या से मुलाकात कर शिकायत दी थी, जिसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। मामले ने इसलिए भी राजनीतिक रंग पकड़ लिया है क्योंकि सच्चिदानंद पांडेय पूर्व में बसपा के टिकट पर अयोध्या लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं और वर्तमान में भाजपा से जुड़े हुए हैं। हाल ही में भाजपा जिला अध्यक्ष से विवाद के चलते भी वह चर्चा में रहे थे।
सच्चिदानंद पांडेय का पलटवार- धर्म-कर्म के लिए मिला था पैसा, हड़पने का सवाल ही नहीं
मामले में सच्चिदानंद पांडेय ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया है कि उन्हें जो 2 लाख मिले थे, वह किसी व्यक्तिगत उधार के रूप में नहीं बल्कि धर्म-कर्म, मेला और भंडारे के आयोजन के लिए दिए गए थे। पांडेय का कहना है कि उन्होंने संबंधित कार्यक्रमों का आयोजन कराया और उसके प्रमाण भी उनके पास मौजूद हैं। उनका आरोप है कि उन्होंने परमहंस आचार्य की राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर मदद की, भाजपा की सदस्यता दिलाने से लेकर अन्य गतिविधियों में सहयोग किया। उनका यह भी कहना है कि आचार्य जी रायबरेली से भाजपा की सीट पर राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा का चुनाव लड़ना चाहते हैं, जिसको लेकर उन्होंने हमारी मदद ली। सच्चिदानंद पांडेय ने यह भी दावा किया कि जब समझौते की बात चल रही थी और वह रकम लौटाने को तैयार थे, तब उनसे मारुति अर्टिगा कार की मांग की गई, जिसके बाद विवाद बढ़ गया। उन्होंने पूरे प्रकरण को अपने खिलाफ रची गई राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि कुछ लोग उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं।
अब जांच से खुलेगा सच
फिलहाल एक पक्ष इसे विश्वासघात और रकम हड़पने का मामला बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष धार्मिक आयोजन के लिए दिए गए सहयोग और राजनीतिक साजिश की दलील दे रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 2 लाख की रकम उधार थी या धर्म-कर्म के लिए दिया गया सहयोग? अब निगाहें पुलिस विवेचना पर टिकी हैं। दस्तावेजों, लेन-देन के रिकॉर्ड और दोनों पक्षों के साक्ष्यों की जांच के बाद ही इस बहुचर्चित विवाद की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।