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अयोध्या: कृषि विश्वविद्यालय कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह की नियुक्ति हुई बहाल! हाईकोर्ट ने दिए 10 दिन के भीतर कुलपति पद का कार्यभार सौंपने के निर्देश

editor
  • Sandeep Shrivastav
  • June 01, 2026 06:06 AM
Ayodhya: Dr. Gyanendra Pratap Singh, Vice Chancellor of the Agricultural University, has been reinstated! The High Court has directed him to take charge within 10 days.

अयोध्या। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज अयोध्या के कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह की नियुक्ति बहाल कर दी है। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने कुलाधिपति द्वारा 25 फरवरी और 3 मार्च 2026 को जारी नियुक्ति रद्द करने संबंधी आदेशों को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने इन आदेशों को मनमाना, अवैध और संविधान के अनत्लेट-14 के विपरीत करार दिया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता द्वारा आदेश की प्रति कुलाधिपति के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के 10 दिनों के भीतर डॉ. सिंह को कुलपति पद का कार्यभार ग्रहण कराया जाए। डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कृषि वैज्ञानिक हैं। उन्हें वर्ष 2025 में राष्ट्रपति द्वारा 'विज्ञान श्री' सम्मान से सम्मानित किया गया था। कुलपति पद के लिए चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनकी नियुक्ति 10 फरवरी 2026 को हुई थी। हालांकि, उस समय वे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) में कार्यरत थे और औपचारिक रूप से कार्यमुक्त होने की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण तत्काल पदभार ग्रहण नहीं कर पाए थे। डॉ. सिंह ने 19 और 26 फरवरी 2026 को राज्य सरकार और कुलाधिपति कार्यालय को पत्र भेजकर 31 मार्च तक कार्यभार ग्रहण करने के लिए समय मांगा था। इसके बावजूद, कुलाधिपति ने 25 फरवरी को उन्हें 1 मार्च तक कार्यभार संभालने का निर्देश दिया। निर्धारित तिथि तक पदभार न लेने पर 3 मार्च को उनकी नियक्ति रह कर दी गई थी।
कुलाधिपति ने 25 फरवरी को उन्हें 1 मार्च तक कार्यभार संभालने का निर्देश दिया। निर्धारित तिथि तक पदभार न लेने पर 3 मार्च को उनकी नियुक्ति रद्द कर दी गई थी। इस आदेश को चुनौती देते हुए डॉ. सिंह ने हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में याचिका दाखिल की। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि नियुक्ति पत्र में कार्यभार ग्रहण करने की कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं थी। न्यायालय ने यह भी माना कि पूर्व में अन्य कुलपतियों को पदभार ग्रहण करने के लिए कई माह का समय दिया गया था। ऐसे में डॉ. सिंह द्वारा लगभग डेढ़ माह का समय मांगना पूरी तरह उचित था। इसी आधार पर अदालत ने उनकी नियुक्ति बहाल करने का आदेश दिया।


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