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अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा मोड़, गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव के भाजपा महानगर अध्यक्ष से कनेक्शन की चर्चा तेज

editor
  • Tapas Vishwas
  • June 26, 2026 01:06 PM
Ayodhya: Major twist in the Ram Mandir donation theft case; speculation intensifies regarding a link between counting in-charge Subhash Srivastava and the BJP's city unit president.

अयोध्या। अयोध्या के विश्व प्रसिद्ध राम जन्मभूमि परिसर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले ने अब भारी राजनीतिक रंग ले लिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में मुख्य आरोपी और राम मंदिर के गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की गिरफ्तारी के बाद उनके राजनीतिक और संगठनात्मक रसूख को लेकर अयोध्या से लेकर लखनऊ तक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के हवाले से यह बड़ा दावा किया जा रहा है कि पुलिस हिरासत में लिए गए सुभाष श्रीवास्तव, भाजपा के महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव के बेहद करीबी रिश्तेदार हैं। इस खुलासे और गंभीर आरोपों के बाद सत्ताधारी दल भाजपा पूरी तरह बैकफुट पर नजर आ रही है।

चर्चाओं और सूत्रों के अनुसार, सुभाष श्रीवास्तव का संबंध लंबे समय से संघ और भाजपा से जुड़े कद्दावर लोगों से रहा है, जिसके बल पर राम जन्मभूमि व्यवस्था में उनकी एंट्री हुई और बाद में वे गणना प्रभारी जैसे बेहद जिम्मेदार पद पर काबिज होने में कामयाब रहे। आरोप है कि सुभाष श्रीवास्तव ने ही राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा से भाजपा महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव की मुलाकात कराई थी। राजनीतिक हलकों में यह दावा किया जा रहा है कि इसी निकटता और रसूख का फायदा उठाकर कमलेश श्रीवास्तव को तीसरी बार भाजपा का महानगर अध्यक्ष बनने में बड़ी मदद मिली। हालांकि, रिश्तेदारी और इन संगठनात्मक साठगांठ के दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इस पूरे प्रकरण के बाद भाजपा संगठन के भीतर की गुटबाजी भी खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के ही एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर सनसनीखेज आरोप लगाया कि सुभाष श्रीवास्तव को मंदिर परिसर का गणना प्रभारी बनवाने में डॉ. अनिल मिश्रा और महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव की मुख्य भूमिका रही थी। इतना ही नहीं, महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव पर पहले भी संगठन में पदाधिकारियों की नियुक्तियों और नगर निगम में नामित पार्षद बनवाने के एवज में भारी आर्थिक लेन-देन (रिश्वत) के आरोप लग चुके हैं। विपक्षी दलों के साथ-साथ खुद भाजपा संगठन का एक धड़ा दबी जुबान में यह दावा कर रहा है कि कमलेश श्रीवास्तव और सुभाष श्रीवास्तव का नाम पहले भी कई संदिग्ध विवादों में आ चुका है। यहाँ तक कि ट्रस्टी अनिल मिश्रा के निजी मकान निर्माण में भी इन दोनों की बेहद सक्रिय भूमिका बताई जा रही है। राम मंदिर के पावन चढ़ावे में चोरी जैसे संवेदनशील मामले में अपनों के नाम सामने आने से भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता में जबरदस्त आक्रोश और नाराजगी देखने को मिल रही है। महानगर अध्यक्ष पर लगातार लग रहे आरोपों के कारण भाजपा संगठन के लिए यह पूरा मामला गले की फांस बन चुका है और पार्टी की साख दांव पर लगी है। फिलहाल, चढ़ावा चोरी के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस सुभाष श्रीवास्तव को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ कर रही है। अब पूरे प्रदेश की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस भारी फजीहत और कार्यकर्ताओं के बढ़ते दबाव के बीच भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अपने महानगर अध्यक्ष और इस पूरे सिंडिकेट पर क्या दंडात्मक कार्रवाई करता है।


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