अयोध्या: 14 कोसी परिक्रमा मार्ग का प्रमुख केंद्र बनेगा अलौकिक! भव्य राम मंदिर की तर्ज पर सजेगा नाका हनुमानगढ़ी मंदिर
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद अब एक और ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल को भव्य स्वरूप मिलने जा रहा है। 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के शुरुआती बिंदु और श्रद्धालुओं की गहरी आस्था के केंद्र नाका हनुमानगढ़ी मंदिर का अब राम मंदिर की तर्ज पर पुनर्निर्माण किया जाएगा। मंदिर के महंत रामदास ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि इस पूरे धार्मिक प्रोजेक्ट को राजस्थान के प्रसिद्ध मकराना मार्बल से तैयार किया जाएगा और प्रस्तावित मंदिर का शिखर 51 फीट से अधिक ऊंचा होगा। नई योजना के तहत पूरे मंदिर परिसर को 100×100 फीट के विशाल क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। हालांकि, मंदिर का गर्भगृह 15×15 फीट का होगा, जिसमें हनुमान जी की वर्तमान और पावन मूर्ति ही सुशोभित रहेगी। इस भव्य परिसर के भीतर संतों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा गया है। परिसर के अंदर संत निवास, गौशाला, यज्ञशाला, भंडार गृह और प्रसाद की दुकानों के साथ-साथ अन्नपूर्णा और जगन्नाथ मंदिर का भी निर्माण किया जाएगा। मंदिर की पारंपरिक मर्यादाओं और व्यवस्थाओं को सुचारू रखने के लिए एक विशेष पहल की गई है। भगवान के भोग और सेवा की परंपराओं को गरिमामय तरीके (पर्दे में) से संपन्न करने के लिए अन्नपूर्णा मंदिर से लेकर सीधे गर्भगृह तक एक अलग कॉरिडोर बनाया जाएगा। इसके अलावा मंदिर में पांचों आरतियों (मंगला, श्रृंगार, राजभोग, संध्या और शयन) की नियमित और पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी और पवित्र कार्य की जिम्मेदारी 'श्री भास्कर दास हनुमानगढ़ी धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट' ने संभाली है। मंदिर का निर्माण पूरी तरह से जनसहयोग के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें देश-विदेश के राम भक्त एक रुपये से लेकर अपनी श्रद्धा और इच्छा के अनुसार दान दे सकेंगे। ट्रस्ट द्वारा इस पूरे प्रोजेक्ट को आगामी तीन साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में मंदिर का आकर्षक मॉडल तैयार किया जा चुका है और जल्द ही विस्तृत डिजाइन, ड्राइंग और बजट को अंतिम रूप देकर निर्माण कार्य का श्रीगणेश किया जाएगा।