अयोध्या राम मंदिर दान विवाद अब सुप्रीम कोर्ट में: करोड़ों की हेराफेरी के संकेत,एफआईआर दर्ज न होने पर उठे सवाल
नई दिल्ली। अयोध्या के ऐतिहासिक और भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित हेराफेरी तथा अनियमितताओं का गंभीर मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के दरवाजे पर पहुंच गया है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में मांग की गई है कि इस पूरे प्रकरण में तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसी से न्यायिक निगरानी में इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और हैरान करने वाला सवाल यह उठ रहा है कि जब जांच एजेंसियों द्वारा भारी रकम बरामद की जा चुकी है और कई संदिग्धों से पूछताछ भी हो चुकी है, तो अब तक इस मामले में आधिकारिक रूप से एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई?
सूत्रों और शुरुआती जांच के मुताबिक, अब तक इस मामले में लगभग ₹2.98 करोड़ की रिकवरी (बरामदगी) की जा चुकी है। इसके साथ ही कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की गई है। गोपनीय जांच में सामने आया है कि यह पूरा घोटाला ₹8 करोड़ से भी अधिक का हो सकता है, हालांकि अंतिम आंकड़े की पुष्टि विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही हो पाएगी। मामले की गंभीरता और करोड़ों भक्तों की आस्था को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने त्वरित कार्रवाई की है। सरकार ने इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन कर दिया है। इस एसआईटी को अगले 15 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत और गोपनीय रिपोर्ट शासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए एसआईटी के गठन को एक बेहद तेज और सराहनीय कदम बताया है। हालांकि याचिकाकर्ता ने इस याचिका में किसी भी व्यक्ति विशेष पर सीधे आरोप नहीं लगाए हैं, लेकिन उनका कहना है कि राम मंदिर से दुनिया भर के करोड़ों सनातनियों की अटूट आस्था जुड़ी है, इसलिए दान की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता होना बेहद जरूरी है। इधर अयोध्या के साधु-संतों और धार्मिक संगठनों ने भी इस जांच पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। संतों ने उम्मीद जताई है कि इस निष्पक्ष जांच से बहुत जल्द दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा, जिससे प्रभु श्रीराम के पावन मंदिर की गरिमा और पवित्रता पर कोई आंच नहीं आएगी। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।