श्रद्धालुओं की सेहत पर ‘बाबा’ की कृपा और डॉक्टरों का पहरा: जसीडीह व देवघर स्टेशन पर 24 घंटे तैनात रहेंगे डॉक्टर, एम्बुलेंस भी रहेगी मुस्तैद
देवघर। विश्व प्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेले में आने वाले देश-विदेश के लाखों-करोड़ों शिवभक्तों (कांवरियों) की सेहत को लेकर इस बार रेलवे और जिला स्वास्थ्य विभाग बेहद गंभीर है। भीड़ के इस महाकुंभ में किसी भी आपात स्थिति से निपटने और श्रद्धालुओं को तुरंत (क्विक रिस्पांस) चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए जसीडीह, देवघर और बैद्यनाथधाम रेलवे स्टेशनों पर चाक-चौबंद तैयारियां की जा रही हैं। इस बार स्वास्थ्य महकमे का मूल मंत्र है—"बीमारी घड़ी देखकर नहीं आती, इसलिए सेवा चौबीस घंटे मुस्तैद रहेगी। इसी सिलसिले में शुक्रवार को आसनसोल रेल मंडल की अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधीक्षक रजनी सिन्हा और देवघर के सिविल सर्जन डॉ. रमेश कुमार के बीच एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक में डॉक्टरों की तैनाती, पैरामेडिकल स्टाफ का रोटेशन, जीवन रक्षक दवाइयां और एम्बुलेंस की चौबीस घंटे उपलब्धता जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों पर विस्तृत रणनीति बनाई गई।
श्रावणी मेले के दौरान जसीडीह रेलवे स्टेशन कांवरियों की आवाजाही का सबसे बड़ा और मुख्य केंद्र होता है। देश के कोने-कोने से आने वाली ट्रेनें यहीं रुकती हैं। इसे देखते हुए बैठक में निर्णय लिया गया है कि जसीडीह स्टेशन पर 24 घंटे डॉक्टरों की तैनाती रहेगी। यहाँ सुरक्षा का दोहरा चक्र (डबल कवच) तैयार किया गया है। राज्य सरकार की ओर से एक डॉक्टर हर शिफ्ट में तैनात रहेंगे। रेलवे प्रशासन की ओर से भी एक डॉक्टर की तैनाती मुस्तैद रहेगी। इन दोनों डॉक्टरों के साथ पैरामेडिकल स्टाफ की पूरी टीम आधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों और दवाओं के साथ मुस्तैद रहेगी, ताकि ट्रेन से उतरते ही या स्टेशन परिसर में किसी भी श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ने पर उसे तत्काल (गोल्डन ऑवर में) प्राथमिक उपचार दिया जा सके। लंबी रेल यात्रा, अत्यधिक भीड़, उमस भरे मौसम और सुल्तानगंज से देवघर की कठिन पैदल यात्रा के कारण अक्सर श्रद्धालुओं को डिहाइड्रेशन, ब्लड प्रेशर, पैर में छाले, दिल का दौरा या सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह चौबीस घंटे वाली व्यवस्था किसी संजीवनी से कम साबित नहीं होगी। सिर्फ प्राथमिक उपचार ही नहीं, बल्कि किसी गंभीर मरीज को उच्च चिकित्सा केंद्र (हायर सेंटर) रेफर करने के लिए भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मेला अवधि के दौरान जसीडीह स्टेशन पर चौबीस घंटे एम्बुलेंस सेवा अलर्ट मोड पर रहेगी। यदि किसी कांवरिया की स्थिति गंभीर होती है, तो बिना एक मिनट गंवाए उसे नजदीकी सदर अस्पताल या देवघर एम्स (AIIMS) पहुंचाया जा सकेगा। रेलवे और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी खुद इस एम्बुलेंस सेवा की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग करेंगे। जसीडीह के अलावा देवघर और बैद्यनाथधाम रेलवे स्टेशनों पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। इन दोनों स्टेशनों की समीक्षा के बाद यह तय किया गया है कि यहाँ भी 24 घंटे पैरामेडिकल कर्मियों की तैनाती की जाएगी। यह स्टाफ स्टेशन पर आने वाले मरीजों को फर्स्ट-एड (प्राथमिक चिकित्सा) देगा और जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत बड़े अस्पतालों से कनेक्ट करने का जरिया बनेगा। तीनों प्रमुख स्टेशनों पर दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश दे दिए गए हैं। समीक्षा बैठक के दौरान सबसे ज्यादा जोर दोनों विभागों (रेलवे और देवघर जिला स्वास्थ्य विभाग) के बीच 'बेहतर समन्वय' पर दिया गया। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि मेले के दौरान अप्रत्याशित भीड़ बढ़ती है, ऐसी स्थिति में सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज होना चाहिए। किसी भी आपात स्थिति या आपदा जैसे हालातों से निपटने के लिए एक संयुक्त कंट्रोल रूम की तरह काम किया जाएगा, ताकि सूचना मिलते ही मेडिकल टीम मौके पर पहुंच सके। अधिकारियों ने साफ किया है कि पूरी मेला अवधि के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की औचक जांच (सप्राइज इंस्पेक्शन) भी की जाएगी ताकि ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की लापरवाही को रोका जा सके। इस बार देवघर आने वाले बाबा के भक्तों को ट्रेन से उतरते ही सुरक्षित और स्वस्थ माहौल देने की पूरी तैयारी है। प्रशासन का यह कदम सराहनीय है, जिससे कांवरियों की राह न सिर्फ सुगम होगी, बल्कि सुरक्षित भी होगी।