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बागेश्वर: बदियाकोट में मां भगवती मंदिर का पुनर्निर्माण शुरू! 1.18 करोड़ की लागत से संवरेगा भव्य स्वरूप, जनसहयोग से बनेगा दिव्य धाम

editor
  • Awaaz Desk
  • October 22, 2026 11:10 AM
Bageshwar: Reconstruction of the Maa Bhagwati Temple in Badiyakot begins! The temple will be transformed into a magnificent shrine at a cost of ₹1.18 crore, with the project being realized through public support.

कपकोट (बागेश्वर)। बागेश्वर जिले की कपकोट तहसील स्थित आस्था के प्रमुख केंद्र ऐतिहासिक आदिबद्री मां भगवती मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर शुरू हो गया है। बीते 16 अक्टूबर को हुए भीषण अग्निकांड में पूरी तरह जलकर राख हुए इस पावन धाम के मलबे और अवशेषों को हटाने का काम विधिवत पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शुरू कर दिया गया है। मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से लगभग 1 करोड़ 18 लाख रुपये की अनुमानित लागत से इस ऐतिहासिक मंदिर को पुनः भव्य एवं दिव्य स्वरूप देने की रूपरेखा तैयार की गई है। गौरतलब है कि 16 अक्टूबर की मध्यरात्रि में लगी भीषण आग ने सदियों पुराने इस मंदिर को भारी क्षति पहुंचाई थी। मंदिर की विशिष्ट और पारंपरिक पर्वतीय काष्ठकला, नक्काशीदार मुख्य भवन, पूजा पंडाल और गर्भ गृह में स्थापित स्वरूप अग्नि की भेंट चढ़ गए थे। मंदिर समिति के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, मुख्य संरचना के साथ-साथ श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित बहुमूल्य चढ़ावे और आभूषणों को मिलाकर करीब चार करोड़ रुपये की परिसंपत्ति का नुकसान हुआ था। इस अप्रत्याशित आपदा से समूचे क्षेत्र और दूर-दराज के श्रद्धालुओं में गहरा शोक व्याप्त था। घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तुरंत संज्ञान लिया था। मुख्यमंत्री ने बागेश्वर की जिलाधिकारी अपूर्वा पांडेय को मौके पर पहुंचकर व्यापक नुकसान का सटीक आकलन करने और मंदिर के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया अविलंब शुरू कराने के सख्त निर्देश दिए थे। प्रशासनिक तत्परता के बाद तकनीकी टीम ने नए निर्माण का खाका तैयार किया और मलबा हटाने की औपचारिकताएं पूरी कीं। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष भरत दानू ने कहा कि भीषण आपदा भी श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को डिगा नहीं पाई है। उन्होंने बताया कि जनसहयोग और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से मंदिर का निर्माण उत्तराखंड की पारंपरिक पहाड़ी शैली और आधुनिक मजबूती के सामंजस्य के साथ किया जाएगा। नव-निर्मित मंदिर परिसर में सुरक्षा मानकों का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी किसी दुर्घटना की पुनरावृत्ति न हो। स्थानीय ग्रामीणों और दूर-दराज से आने वाले भक्तों ने भी श्रमदान और आर्थिक सहयोग का संकल्प दोहराया है।


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