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देवभूमि में अकीदत और उल्लास के साथ मनाई गई बकरीद: मस्जिदों-ईदगाहों में गूंजी अमन की दुआ, सड़कों पर नमाज न पढ़ने के नियमों का हुआ पालन

editor
  • Tapas Vishwas
  • May 28, 2026 06:05 AM
Bakrid Celebrated with Devotion and Fervor in the 'Land of Gods': Prayers for Peace Resound in Mosques and Eidgahs; Rules Against Offering Prayers on Roads Strictly Adhered To.

देहरादून। उत्तराखंड में त्याग और समर्पण का पावन पर्व ईद-उल-अजहा (बकरीद) गुरुवार को पूरे राज्य में पारंपरिक अकीदत, सादगी और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। राजधानी देहरादून समेत मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों की विभिन्न मस्जिदों और ईदगाहों में सुबह मुस्लिम समाज के हजारों लोगों ने कतारबद्ध होकर बकरीद की विशेष नमाज अदा की। इस दौरान बारगाह-ए-इलाही में देश की तरक्की, खुशहाली, आपसी भाईचारे और अमन-चैन को बनाए रखने के लिए विशेष दुआएं मांगी गईं। नमाज मुकम्मल होने के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर पर्व की मुबारकबाद दी।

देहरादून के चकराता रोड स्थित मुख्य ईदगाह में सुबह 7:35 बजे शहर काजी मुफ्ती हशीम अहमद कासमी ने नमाज अदा कराई। अपने खुतबे में उन्होंने लोगों को आपसी गिले-शिकवे मिटाकर प्रेम से रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा, "यह पर्व खुदा का इनाम है, इसे सादगी से मनाएं। अपने आस-पास के गरीबों, यतीमों और कमजोरों को अपनी खुशियों में शामिल करें।" साथ ही उन्होंने प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी न करने और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने की अपील की। वहीं, गांधी ग्राम स्थित गौसिया मस्जिद में आल इंडिया मुस्लिम जमात के प्रदेश अध्यक्ष और नाएब शहर काजी सैयद अशरफ़ हुसैन क़ादरी ने सवा आठ बजे नमाज कराई। उन्होंने युवाओं से विशेष अपील करते हुए कहा कि वे कुर्बानी के फोटो या वीडियो इंटरनेट मीडिया (सोशल मीडिया) पर भूलकर भी पोस्ट न करें। इसके अलावा देहरादून की मुस्लिम कालोनी, सुभाषनगर, पटेल बाजार, कारगी और राजीव नगर आदि क्षेत्रों की मस्जिदों में भी रौनक देखी गई। इस बार त्योहार के दौरान प्रशासनिक अनुशासन की एक बेहतरीन मिसाल रामनगर में देखने को मिली। पिछले वर्षों तक ईदगाह में जगह कम पड़ने के कारण लोग सड़क पर भी नमाज अदा करते थे, लेकिन इस बार पुलिस-प्रशासन के सख्त निर्देशों का मुस्लिम समाज ने पूरी तरह पालन किया। सुबह मोहल्ला खताड़ी स्थित मुख्य ईदगाह के भीतर ही नमाज संपन्न हुई और बाहर सड़क पूरी तरह खाली रही। इस दौरान एसडीएम और कोतवाल भारी पुलिस बल के साथ मुस्तैद रहे। नमाज के बाद राजनीतिक सौहार्द भी देखने को मिला, जहाँ भाजपा और कांग्रेस के तमाम दिग्गजों ने ईदगाह के बाहर पहुंचकर मुस्लिम समुदाय के लोगों को गले मिलकर बधाई दी। रुड़की के ईदगाह चौक, भगवानपुर के खेलपुर और लंढौरा समेत विभिन्न स्थानों पर शांतिपूर्वक नमाज हुई। वहीं कोटद्वार के ग्रस्टनगंज स्थित मुख्य ईदगाह में पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों से आए अकीदतमंदों ने मौलाना बदरुल इस्लाम की सरपरस्ती में नमाज पढ़ी। लकड़ीपड़ाव की मदीना मस्जिद में भी नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ी। पर्वतीय क्षेत्र श्रीनगर में जगह की अनुकूलता को देखते हुए तीन चरणों (सुबह 7:30, 8:30 और 9:30 बजे) में नमाज का सिलसिला चला, जिससे कानून-व्यवस्था बनी रही। नमाज संपन्न होने के बाद चिन्हित और वैधानिक जानवरों की कुर्बानी का सिलसिला शुरू हो गया। पूरे राज्य में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। पुलिस विभाग की साइबर सेल सोशल मीडिया पर पैनी नजर रख रही है, ताकि कुर्बानी की कोई भी संवेदनशील तस्वीर या वीडियो इंटरनेट पर प्रसारित न हो सके और देवभूमि का सांप्रदायिक सौहार्द हर हाल में कायम रहे।


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