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रांची में बलिदान दिवस: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर नमन, बीजेपी दिग्गजों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

editor
  • Tapas Vishwas
  • June 23, 2026 12:06 PM
Balidan Diwas' in Ranchi: Tributes paid on Dr. Syama Prasad Mookerjee's martyrdom day; BJP stalwarts offer heartfelt homage.

रांची। भारतीय जनसंघ के संस्थापक, महान शिक्षाविद् और प्रखर राष्ट्रवादी नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस के अवसर पर मंगलवार को राजधानी रांची समेत पूरे झारखंड में उन्हें भावपूर्ण स्मरण किया गया। बीजेपी और जनसंघ की विचारधारा से जुड़े हजारों कार्यकर्ताओं और शीर्ष नेताओं ने देश की एकता और अखंडता के लिए उनके द्वारा दिए गए सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर रांची के हरमू स्थित 'डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क' में एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू सहित राज्य के कई वरिष्ठ नेताओं ने डॉ. मुखर्जी की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी महज एक नेता नहीं, बल्कि हम सभी के वैचारिक पुरोधा हैं। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया। उन्होंने देश के लिए जीने का काम किया और देश के लिए ही मरने का काम किया। ऐसे अद्वितीय महापुरुष का बलिदान दिवस हम सभी राष्ट्रभक्तों के लिए एक 'प्रेरणा दिवस' है। उनके विचार और सिद्धांत आज के दौर में भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने पहले थे और आने वाली पीढ़ियों का हमेशा मार्गदर्शन करते रहेंगे। इस मौके पर मौजूद पूर्व नगर विकास मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी विधायक सीपी सिंह ने भी डॉ. मुखर्जी को नमन करते हुए इतिहास के पन्नों को पलटा। उन्होंने कहा कि आज यदि जम्मू-कश्मीर पूर्ण रूप से भारत का मुकुट और अभिन्न अंग बना हुआ है, तो यह सिर्फ और सिर्फ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के कड़े संघर्ष और बलिदान की बदौलत ही संभव हो सका है। विधायक सीपी सिंह ने आगे कहा कि डॉ. मुखर्जी जम्मू-कश्मीर में अलग झंडे, अलग संविधान और अलग प्रधान (मुख्यमंत्री को वजीर-ए-आजम कहना) की व्यवस्था के सख्त खिलाफ थे। इसी दमनकारी नीति के विरोध में उन्होंने नारा दिया था कि 'एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान नहीं चलेंगे'। इसी मांग को लेकर उन्होंने बिना किसी सरकारी परमिट के जम्मू-कश्मीर की सीमा में प्रवेश कर आंदोलन किया था, जहां उन्हें तत्कालीन व्यवस्था द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया और हिरासत के दौरान ही देश की एकता के लिए उनकी सांसें थम गईं। हरमू पार्क में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में प्रदेश संगठन के कई बड़े चेहरे एक साथ नजर आए। श्रद्धा सुमन अर्पित करने वालों में मुख्य रूप से संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, प्रदेश महामंत्री गणेश मिश्रा, पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, मातृशक्ति और युवा कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी कार्यकर्ताओं ने डॉ. मुखर्जी के पदचिह्नों पर चलते हुए राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ काम करने का सामूहिक संकल्प लिया।


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