बिग ब्रेकिंगः दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पुलिसिया कार्रवाई से गरमाई सियासत! राहुल गांधी के सामने छात्रा ने सुनाई कथित मारपीट की दास्तान
नई दिल्ली। दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए छात्रों और युवाओं के साथ कथित पुलिस बर्बरता का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने घायल छात्रों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उनकी आपबीती सुनी। इस दौरान छात्रों ने पुलिस पर मारपीट, धमकी देने और हिरासत में प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए। वहीं, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर भी सियासी घमासान तेज हो गया है। राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे शांतिपूर्ण विरोध और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी के साथ पांच से अधिक छात्र मौजूद रहे। छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और हिरासत में लेकर मारपीट की। एक छात्र ने दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने उसे कथित तौर पर यह कहने के लिए मजबूर किया कि दिल्ली पुलिस उसकी ‘पापा’ है। छात्र की बात सुनने के बाद राहुल गांधी ने उससे पूछा कि क्या उसे डर लगा था। छात्र ने जवाब दिया कि शुरुआत में वह डरा हुआ था, लेकिन अब उसे डर नहीं लग रहा। छात्रा आदिरा ने आरोप लगाया कि हिरासत में लिए जाने के बाद उन्हें बस में बैठाकर कनॉट प्लेस के पुलिस स्टेशन ले जाया गया। उनके मुताबिक, वहां से उन्हें बेसमेंट में ले जाया गया, जहां सात-आठ लोगों ने उनके साथ मारपीट की। आदिरा ने दावा किया कि एक स्थान पर सीसीटीवी कैमरा नहीं था और वहां मौजूद तीन-चार पुलिसकर्मी लगातार उन्हें पीटते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध नहीं करने और बार-बार कुछ नहीं करने की बात कहने के बावजूद उनके साथ मारपीट जारी रही। प्रदर्शनकारी रमित ने भी पुलिस पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया। कंटेंट क्रिएटर रमित के मुताबिक, 11 अक्टूबर को हिरासत में लिए जाने के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की और उनके फोन छीन लिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौके पर महिला पुलिस अधिकारी मौजूद नहीं थीं। वहीं, प्रदर्शनकारी धर्मेंद्र ने दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ लात-घूंसे और थप्पड़ों से मारपीट की। उन्होंने एक पुलिसकर्मी पर धमकी देने और पैसे लेकर प्रदर्शन में आने का आरोप लगाने की बात भी कही। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस का पक्ष सामने आना और उनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
सीजेपी नेताओं की हिरासत पर राहुल गांधी का विरोध
दूसरी ओर, सीजेपी के सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराना अपराध नहीं है और इसके लिए युवाओं को जेल भेजना कायरतापूर्ण कदम है। राहुल ने कहा कि छात्र, युवा, पत्रकार और INDIA गठबंधन भले ही अलग-अलग बैनर के तहत प्रदर्शन कर रहे हों, लेकिन सभी अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी सवाल उठाया कि राष्ट्रीय ध्वज लहराना अपराध कैसे हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार असहमति की आवाज दबाने के लिए कार्रवाई कर रही है। दिपके ने कहा कि ऐसे कदमों से पार्टी के कार्यकर्ता पीछे हटने वाले नहीं हैं। सीजेपी नेताओं की न्यायिक हिरासत पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी नाराजगी जताई। उन्होंने एक्स पर लिखा कि अपने ही देश में अपना झंडा लहराना अपराध नहीं हो सकता और इस कार्रवाई को बेतुका बताया। डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने भी युवाओं को हिरासत में भेजे जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी सौरव दास और आशुतोष रांका को जरूरी कानूनी सहायता देने के लिए तैयार है। शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने भी कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने सवाल किया कि राष्ट्रीय ध्वज पकड़ना युवाओं के लिए अपराध कब से हो गया। इस घटनाक्रम ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के साथ कथित पुलिस बर्ताव और विरोध के अधिकार को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। अब मामले में पुलिस का पक्ष और आरोपों की जांच अहम होगी।