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बड़ी खबरः 2019 के चुनावी मंच पर दिए बयान ने बढ़ाई आजम खान की मुश्किलें! अफसर से जूते साफ कराने वाले बयान पर कोर्ट का फैसला, दो साल की सजा

editor
  • Awaaz Desk
  • May 16, 2026 09:05 AM
Big news: Azam Khan's 2019 election campaign statement has added to his troubles! Court verdict: Two-year sentence for making officer clean his shoes

रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान को वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए विवादित बयान के मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है। रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने तत्कालीन जिलाधिकारी के खिलाफ अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में उन्हें दोषी करार देते हुए दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने इसके साथ ही उन पर 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। बता दें कि आजम खान पहले से ही कई अन्य मामलों में कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। यह मामला वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान रामपुर के भोट थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया था। आरोप था कि चुनाव प्रचार के दौरान आयोजित एक जनसभा में आजम खान ने तत्कालीन जिलाधिकारी को लेकर सार्वजनिक मंच से अभद्र टिप्पणी की थी। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि ‘सब डटे रहो, यह कलेक्टर-पलेक्टर से मत डरियो। यह तनखैया है और तनखैयों से नहीं डरते। देखे हैं कई मायावती के फोटो, कैसे बड़े-बड़े अफसर रूमाल निकालकर जूते साफ कर रहे हैं। उन्हीं से गठबंधन है, उन्हीं के जूते साफ कराऊंगा इनसे, अल्लाह ने चाहा। इस बयान के सार्वजनिक होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने कड़ी आपत्ति जताई थी। अधिकारियों का आरोप था कि इस तरह की टिप्पणी से प्रशासनिक गरिमा को ठेस पहुंची और चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन हुआ। इसके बाद भोट थाने में आजम खान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।

पुलिस ने मामले की जांच के बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाह पेश किए और उनके बयान अदालत में दर्ज कराए गए। अभियोजन पक्ष का तर्क था कि आजम खान ने सार्वजनिक मंच से एक सरकारी अधिकारी के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया, जो कानून की दृष्टि में अपराध है। मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद एमपी-एमएलए कोर्ट ने आजम खान को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। अदालत ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को गरिमामय भाषा का प्रयोग करना चाहिए और किसी भी अधिकारी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार्य नहीं हो सकती। गौरतलब है कि आजम खान पिछले कुछ वर्षों से लगातार कानूनी विवादों में घिरे रहे हैं। उनके खिलाफ जमीन कब्जाने, प्रशासनिक अनियमितताओं और अन्य मामलों में कई मुकदमे दर्ज हैं, जिनकी सुनवाई विभिन्न अदालतों में चल रही है। ऐसे में यह ताजा फैसला उनके राजनीतिक भविष्य के लिए भी अहम माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सजा के खिलाफ उच्च अदालत में राहत नहीं मिलती, तो इसका असर उनकी चुनावी पात्रता और राजनीतिक सक्रियता पर पड़ सकता है।

 


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