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बड़ी खबरः बंगाल में भाषण के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ से हुई चूक! सुभाष चंद्र बोस का नारा विवेकानंद का बताया, वीडियो वायरल होते ही गरमाई सियासत

editor
  • Awaaz Desk
  • April 22, 2026 09:04 AM
Big news: CM Yogi Adityanath made a mistake during his speech in Bengal! He attributed Subhash Chandra Bose's slogan to Vivekananda, sparking a political firestorm as the video went viral.

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक बयान ने सियासी माहौल गरमा दिया है। पुरुलिया जिले के जॉयपुर विधानसभा क्षेत्र में एक रैली के दौरान सीएम योगी ने प्रसिद्ध नारा ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा’ सुभाष चंद्र बोस की जगह स्वामी विवेकानंद का बता दिया। वीडियो सामने आते ही टीएमसी ने इसे मुद्दा बनाते हुए भाजपा और योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए इसे ऐतिहासिक अज्ञानता करार दिया और कहा कि यह बंगाल की विरासत का अपमान है। टीएमसी ने अपने बयान में कहा कि नेताजी और स्वामी विवेकानंद दो अलग-अलग व्यक्तित्व हैं, जिनकी अपनी-अपनी विरासत है और इस तरह का बयान दोनों का अपमान है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं को बंगाल के इतिहास की समझ नहीं है। इस विवाद में टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रां भी कूद पड़ीं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अपने तथ्य ठीक करने चाहिए और यह नारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस का ही है, न कि स्वामी विवेकानंद का। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई। हालांकि विवाद यहीं नहीं रुका। महुआ मोइत्रा के पोस्ट के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने योगी आदित्यनाथ के अन्य वीडियो शेयर किए, जिनमें वे इसी नारे को सही तरीके से नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जोड़ते नजर आ रहे हैं। इसके बाद महुआ मोइत्रा ने एक और पोस्ट कर वीडियो का लिंक और टाइमस्टैंप साझा किया और आरोप लगाया कि भाजपा का इकोसिस्टम भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। पूरे मामले की पड़ताल करने पर सामने आया कि 20 अप्रैल को योगी आदित्यनाथ ने पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मेदिनीपुर, पुरुलिया और झारग्राम में चुनावी रैलियां की थीं। इन तीनों सभाओं में उन्होंने इस ऐतिहासिक नारे का जिक्र किया। पश्चिमी मेदिनीपुर और झारग्राम की रैलियों में उन्होंने इस नारे को सही रूप से नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जोड़ा। हालांकि पुरुलिया की एक रैली में उन्होंने इसे स्वामी विवेकानंद का बता दिया, जिसे जानकार एक ऐतिहासिक चूक मान रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी माहौल में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। टीएमसी इसे भाजपा की अज्ञानता और बंगाल विरोधी मानसिकता से जोड़ रही है, जबकि भाजपा समर्थक इसे एक सामान्य मानवीय भूल बता रहे हैं।


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