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बड़ी खबरः सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा हस्तक्षेप! सरकारों को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

editor
  • Awaaz Desk
  • July 15, 2026 09:07 AM
Big News: Delhi High Court intervenes significantly in Sonam Wangchuk's hunger strike! Notices issued to governments seeking a response.

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक की लगातार बिगड़ती सेहत अब अदालत की चौखट तक पहुंच गई है। उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली और अहम सुनवाई गुरुवार को होगी, जिसमें अदालत यह जानना चाहेगी कि वांगचुक की स्वास्थ्य सुरक्षा और उपचार को लेकर सरकारों ने अब तक क्या कदम उठाए हैं। यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि लगातार भूख हड़ताल के चलते सोनम वांगचुक की शारीरिक स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। दावा किया गया है कि उनका वजन लगभग 8.5 किलोग्राम कम हो चुका है और चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार यदि उनका अनशन इसी तरह जारी रहा तो उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। याचिका में हाईकोर्ट से अनुरोध किया गया है कि वह केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दें कि सोनम वांगचुक को तत्काल किसी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया जाए। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर उन्हें लिक्विड डाइट, विटामिन, मिनरल्स और अन्य आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनके जीवन की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष यह भी तर्क रखा कि यदि जवाबदेही की मांग कर रहे एक सामाजिक कार्यकर्ता की भूख हड़ताल के दौरान मौत हो जाती है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और देश की संवैधानिक मूल्यों के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक स्थिति होगी। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के तहत प्रत्येक नागरिक को जीवन का अधिकार प्राप्त है और ऐसे मामलों में न्यायालय का हस्तक्षेप आवश्यक हो जाता है। गौरतलब है कि सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर चल रहे उस आंदोलन का हिस्सा हैं, जिसमें नीट पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और जवाबदेही की मांग को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है। आंदोलनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। बुधवार को इस मामले की विस्तृत सुनवाई वकीलों की हड़ताल के कारण नहीं हो सकी, लेकिन अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया। 


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