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बड़ी खबरः कल रात लगेगा साल का अंतिम सूर्य ग्रहण! 13 अगस्त की रात होगा खत्म, भारत में दिखाई नहीं देगा

editor
  • Awaaz Desk
  • August 11, 2026 01:08 PM
Big News: The year's final solar eclipse will occur tomorrow night! It will end on the night of August 13 and will not be visible in India.

नई दिल्ली। साल 2026 का आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगने जा रहा है। भारतीय समयानुसार सूर्य ग्रहण की शुरुआत रात 9 बजकर 04 मिनट पर होगी, जबकि इसका मध्य या पीक टाइम रात 11 बजकर 16 मिनट पर रहेगा। ग्रहण का समापन 13 अगस्त की देर रात 1 बजकर 27 मिनट पर होगा। हालांकि, भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसी वजह से यहां इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा और आम लोगों को ग्रहण को लेकर किसी विशेष धार्मिक प्रतिबंध का पालन नहीं करना पड़ेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में लगेगा। हिंदू पंचांग के मुताबिक ग्रहण हरियाली अमावस्या के संयोग में पड़ रहा है। ज्योतिषविदों के अनुसार ग्रहण के दौरान मंगल और शनि एक-दूसरे से केंद्र स्थिति में रहेंगे, जबकि राहु और मंगल भी निकट अंशों में बताए जा रहे हैं। इन ग्रह स्थितियों को देखते हुए कुछ ज्योतिषविदों ने प्राकृतिक और राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर आशंकाएं जताई हैं। उनका कहना है कि जल संबंधी या प्राकृतिक आपदाओं, बाढ़ और ग्लेशियर पिघलने जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही सत्ता में बैठे लोगों के सामने चुनौतियां बढ़ने और सरकारों के खिलाफ जनविरोध तेज होने की भी ज्योतिषीय संभावना जताई गई है। हालांकि, ये ज्योतिषीय मान्यताएं हैं और वैज्ञानिक रूप से इनका आपदाओं या राजनीतिक घटनाओं से संबंध प्रमाणित नहीं है।

कहां-कहां दिखाई देगा सूर्य ग्रहण, क्या होता है सूर्य ग्रहण?
खगोलीय जानकारी के अनुसार यह सूर्य ग्रहण उत्तरी प्रशांत महासागर, पश्चिमी यूरोप, पश्चिमी अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के कई हिस्सों में दिखाई देगा। ग्रहण का मुख्य मार्ग ग्रीनलैंड, आइसलैंड और उत्तरी रूस से होकर गुजरने की जानकारी है। स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा, जबकि दुनिया के कई अन्य क्षेत्रों में यह आंशिक रूप में नजर आएगा। भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण यहां इसके प्रत्यक्ष प्रभाव की स्थिति नहीं बनेगी। खगोल विज्ञान के अनुसार सूर्य ग्रहण उस समय होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। ऐसी स्थिति में चंद्रमा की छाया पृथ्वी की सतह पर पड़ती है और जिन क्षेत्रों में यह छाया पहुंचती है, वहां सूर्य पूरी तरह या आंशिक रूप से दिखाई नहीं देता। यह एक सामान्य खगोलीय घटना है।

धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण का महत्व
सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण अमावस्या तिथि को ही होता है। धार्मिक कथाओं में इसका संबंध राहु और सूर्य देव से जोड़ा गया है। मान्यता है कि स्वरभानु नामक असुर का सिर धड़ से अलग होने के बाद सिर वाला हिस्सा राहु कहलाया और वह अमावस्या के दिन सूर्य को ग्रसता है। हालांकि, खगोलीय विज्ञान सूर्य ग्रहण को सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी की स्थिति से होने वाली प्राकृतिक घटना के रूप में समझाता है।

ग्रहण को लेकर क्या सावधानी बरतें
चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल लागू नहीं होगा। ग्रहण देखने के लिए वैज्ञानिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण सावधानी आंखों की सुरक्षा है। किसी भी सूर्य ग्रहण को सीधे खुली आंखों से नहीं देखना चाहिए। सूर्य को देखने के लिए प्रमाणित सोलर फिल्टर या ग्रहण देखने वाले सुरक्षित उपकरणों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। ग्रहण के दौरान भोजन, पूजा-पाठ, गर्भवती महिलाओं के घर से बाहर निकलने या धारदार वस्तुओं के इस्तेमाल को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। इनका पालन व्यक्तिगत आस्था का विषय है। वैज्ञानिक दृष्टि से इन गतिविधियों को ग्रहण के कारण रोकने का कोई प्रमाण नहीं है। ग्रहण की अवधि में मंत्र जाप, पूजा या धार्मिक अनुष्ठान भी श्रद्धा के अनुसार किए जा सकते हैं। कुल मिलाकर 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण घटना होगा, लेकिन भारत में रहने वाले लोगों के लिए इसका सबसे अहम तथ्य यही है कि यह ग्रहण यहां दिखाई नहीं देगा और सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।


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