सहकारिता चुनाव में बीजेपी का 'क्लीन स्वीप': उत्तराखंड के सभी 9 जिला सहकारी विकास संघों में भाजपा समर्थित प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित
देहरादून। उत्तराखंड के सहकारिता चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए एकतरफा जीत हासिल की है। प्रदेश के सभी नौ जिला सहकारी विकास संघों (डीसीडीएफ) के अध्यक्ष पदों पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं। इस चुनाव की सबसे खास और ऐतिहासिक बात यह रही कि राज्य में पहली बार लागू किए गए 33 फीसदी महिला आरक्षण का जबरदस्त असर देखने को मिला, जिसके चलते तीन जिला सहकारी विकास संघों में महिला अध्यक्षों ने निर्विरोध जीत दर्ज कर सहकारिता के शीर्ष नेतृत्व में कदम रखा है। सहकारिता विभाग ने इस चुनाव को महिलाओं की भागीदारी और ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी और महत्वपूर्ण पहल बताया है। सभी नौ संघों में विपक्ष की गैर-मौजूदगी और निर्विरोध निर्वाचन को भाजपा सरकार की नीतियों पर जनता के भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।
इस शानदार सफलता पर प्रदेश के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सभी नवनिर्वाचित अध्यक्षों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि सहकारिता संस्थाओं के यह चुनाव पूरी तरह से लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप और गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न हुए हैं। सभी नौ जिला सहकारी विकास संघों में निर्विरोध निर्वाचन होना यह साफ दर्शाता है कि राज्य की जनता और सहकारिता से जुड़े लोगों के बीच वर्तमान सहकारिता संस्थाओं के प्रति एक बेहद सकारात्मक वातावरण बना हुआ है। सहकारिता मंत्री ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार सहकारिता क्षेत्र को निरंतर मजबूत और आधुनिक बना रही है। सहकारी समितियों में पारदर्शिता जवाबदेही और संपूर्ण डिजिटलीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना और अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को लाभ पहुंचाना है। उन्होंने यह भी एलान किया कि जिला सहकारी विकास संघों के सफल चुनाव के बाद अब अगले चरण में जिला सहकारी बैंकों के चुनाव कराए जाने प्रस्तावित हैं, जिसके लिए सरकार स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इन चुनावों के संपन्न होने के बाद अब उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में विकास कार्यों और सहकारिता योजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है। नवनिर्वाचित अध्यक्षों के कंधों पर पारदर्शिता के साथ समितियों को आगे बढ़ाने और युवाओं व महिलाओं को स्टार्टअप्स तथा छोटे उद्योगों से जोड़ने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।