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खाद की कालाबाजारी करने वालों की अब खैर नहीं! उपायुक्त सख्त निर्देश,बिना आधार प्रमाणीकरण और ई-पॉस मशीन के नहीं बिकेगा एक भी कट्टा

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 11, 2026 12:07 PM
Black marketers of fertilizer are in for trouble! The Deputy Commissioner has issued strict instructions: not a single bag is to be sold without Aadhaar authentication and the use of e-PoS machines.

गुमला। झारखंड के गुमला जिले में किसानों के हक पर डाका डालने वाले और खाद की कालाबाजारी करने वाले बिचौलियों व उर्वरक विक्रेताओं के खिलाफ जिला प्रशासन ने पूरी तरह से कमर कस ली है। जिले में उर्वरक की कालाबाजारी और वितरण में होने वाली अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जिला स्तरीय टास्क फोर्स की एक अहम बैठक उपायुक्त (डीसी) दिलेश्वर महतो की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में उपायुक्त ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि किसानों को निर्धारित मूल्य पर ही खाद मिलनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि जिले में संयुक्त छापेमारी अभियान चलाकर हर दुकान की नियमित जांच की जाए। डीसी ने कड़े शब्दों में कहा, "बिना आधार प्रमाणीकरणऔर ई-पॉस मशीन के किसी भी परिस्थिति में किसानों को उर्वरक का वितरण नहीं किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य उर्वरक बिक्री की पूरी प्रक्रिया में शत-प्रतिशत पारदर्शिता लाना है। इसके लिए बैठक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।  जिले में संचालित सभी उर्वरक दुकानों पर निर्धारित मूल्य सूची (रेट चार्ट) ऐसी जगह लगानी होगी, जहां दुकान पर पहुंचने वाले किसान उसे आसानी से देख और पढ़ सकें। उपायुक्त ने कहा कि मूल्य सूची प्रदर्शित रहने से विक्रेता अपनी मनमर्जी के दाम नहीं वसूल सकेंगे। यदि कोई विक्रेता निर्धारित दर से अधिक राशि की मांग करता है, तो किसान सीधे अधिकारियों से शिकायत कर सकते हैं। अब उर्वरक विक्रेताओं का वैध लाइसेंस सिर्फ फाइलों की शोभा नहीं बढ़ाएगा, बल्कि उसे दुकान पर प्रदर्शित करना होगा। इससे किसानों को यह पता चल सकेगा कि वे किसी अधिकृत डीलर से ही खाद खरीद रहे हैं।

उपायुक्त ने संबंधित विभागों को संयुक्त रूप से नियमित छापेमारी अभियान चलाने का निर्देश दिया है। उन्होंने साफ किया कि जांच अभियान केवल कागजी औपचारिकता बनकर नहीं रहना चाहिए। अधिकारियों की टीम जब दुकानों पर औचक निरीक्षण के लिए पहुंचेगी, तो मुख्य रूप से इन 5 बिंदुओं पर कड़ाई से जांच होगी।  छापेमारी के दौरान यदि किसी भी स्तर पर स्टॉक में अंतर या वितरण में वित्तीय अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित विक्रेता का लाइसेंस रद्द करने के साथ-साथ उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वितरण व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। डीसी ने स्पष्ट किया कि खाद वितरण का सही रिकॉर्ड रखने के लिए डिजिटल सत्यापन अनिवार्य है। इससे यह स्पष्ट रूप से ट्रैक किया जा सकेगा कि किस किसान को कितनी मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया गया है। जिला प्रशासन का मानना है कि किसानों को पर्याप्त और स्पष्ट जानकारी उपलब्ध होने से और हर लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड रहने से अवैध बिक्री और कालाबाजारी की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी। क्षेत्र में उर्वरक की उपलब्धता, किसानों की समस्याओं और विक्रेताओं की गतिविधियों पर सूक्ष्म नजर रखने के लिए उपायुक्त ने अनुमंडल पदाधिकारी स्तर पर भी टास्क फोर्स की नियमित बैठकें आयोजित करने का निर्देश दिया है। इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अपर समाहर्ता गुमला राजीव नीरज, एसडीपीओ चैनपुर श्रुति अग्रवाल, सदर एसडीपीओ सुरेश प्रसाद यादव, डीएसपी मुख्यालय गुमला और जिला कृषि पदाधिकारी सहित कृषि विभाग के कई अन्य संबंधित पदाधिकारी और कर्मी उपस्थित थे। जिला प्रशासन के इस कड़े रुख से गुमला के किसानों में सही मूल्य पर खाद मिलने की उम्मीद जगी है, वहीं कालाबाजारी करने वाले सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है।


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