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ब्रेकिंग:कोविड 19 से मरने वालों के परिजनों को जल्द दे मुआवजा, नहीं तो.......???? सुप्रीम कोर्ट ने किस राज्य सरकार को लगाई फटकार? लिंक पर क्लिक करें

editor
  • Kanchan Verma
  • November 22, 2021 11:11 AM
Breaking: Compensation should be given to the families of those who died of Covid 19 soon, otherwise.......???? Which state government was reprimanded by the Supreme Court? Click the link

पिछले दो सालों में कोरोना से न जाने कितने घर बर्बाद हुए। अब तक कई घरों में मुख्या की जगह खाली है यानी वहाँ कमाने वाला कोई नही और सरकार की ओर से इन परिवारों को मुआवजा देने में लेट लतीफी की जा रही है। 
 
 गुजरात में कोरोना काल मे कोरोना की वजह से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को भी सरकार से मुआवजा नही मिल पा रहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। 
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीड़ितों को जल्द मुआवजा दिया जाए, नहीं तो लीगल सर्विस अथॉरिटी को जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। मामले पर सॉलिसीटर जनरल के साथ बैठकर प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।

शीर्ष अदालत में गुजरात के मुख्य सचिव पंकज कुमार पेश हुए, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें भी फटकार लगाते हुए तल्ख टिप्पणी की और कहा, ‘आपके मुख्यमंत्री को कुछ नहीं पता? श्रीमान सचिव, आप वहां किस लिए हैं? यदि यह आपके मुताबिक आवेदन है तो आप कुछ भी नहीं जानते हैं।क्या आप अंग्रेजी जानते हैं? क्या आप हमारे आदेश को समझते हैं? यह देरी करने का सिर्फ एक नौकरशाही प्रयास है.’ सुप्रीम कोर्ट मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर को करेगा।

ग़ौरतलब है कि इससे पहले 18 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अनुग्रह राशि देने के संबंध में दिए गए उसके निर्देशों के विपरीत अधिसूचना जारी करने पर गुजरात सरकार से  नाराज़गी व्यक्त की थी। शीर्ष अदालत ने कहा था कि कोविड-19 से मृत किसी व्यक्ति के परिजन को 50,000 रुपए का मुआवजा देने से कोई भी सरकार केवल इस आधार पर मना नहीं करेगी कि मृत्यु प्रमाणपत्र में कारण में वायरस का उल्लेख नहीं है । कोर्ट ने यह भी कहा था कि संबंधित जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण या जिला प्रशासन में कोरोना वायरस के कारण मृत्यु के प्रमाणपत्र और कारण 'कोविड-19 की वजह से मृत्यु' प्रमाणित किए जाने के साथ आवेदन करने की तारीख से 30 दिन के अंदर अनुग्रह राशि दी जानी होती है। ये मामला न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया था। पीठ ने अपने आदेश में कहा था, ’29 अक्टूबर, 2021 की अधिसूचना देखने के बाद हमें लगता है कि यह इस अदालत द्वारा चार अक्टूबर, 2021 के एक आदेश में जारी निर्देशों के बिल्कुल विपरीत हैं। शीर्ष अदालत ने कहा था कि आवेदन की प्रति सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता को दी जाए जो इस पर जवाब दाखिल करेंगे।


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