• Home
  • News
  • BREAKING: In a BJP-ruled state, the principal secretary to the chief minister treated a woman IAS officer like this? Jaleel did it by saying getout, insulted on the matter, the lady officer told the incident

ब्रेकिंग:बीजेपी शासित इस राज्य में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव का महिला आईएएस अधिकारी के साथ ऐसा बर्ताव? गेटआउट कहकर किया जलील,बात बात पर किया बेइज्जत,महिला अधिकारी ने आपबीती बताई

editor
  • Kanchan Verma
  • July 17, 2022 10:07 AM
BREAKING: In a BJP-ruled state, the principal secretary to the chief minister treated a woman IAS officer like this? Jaleel did it by saying getout, insulted on the matter, the lady officer told the incident

बेटी हूँ लड़ सकती हूं! बेटी बचाओ बेटी बढ़ाओ!  ये नारे बीजेपी के लिए चुनावो में जीतने के लिए सबसे बड़ा हथियार बनते है। लेकिन बीजेपी शासित मध्यप्रदेश में सीएम शिवराज सिंह चौहान के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी द्वारा आईएएस महिला अधिकारी के साथ अभद्रता का मामला सामने आया है। मध्यप्रदेश कैडर की 2011 बैच की आईएएस नेहा मारव्या ने मामले में व्हाट्सएप ग्रुप पर आपबीती लिख दी जिसके बाद अब बवाल मचा हुआ है। नेहा ने प्रताड़ना से तंग आकर ये तक लिख दिया कि मुझे अब इंसान होने में भी शर्म आ रही है। 
इससे पहले भी आईएएस अधिकारी निधि सिंह के साथ भी कुछ ऐसा ही एक विवाद हुआ था।


आइये अब जानते है आखिर आईएएस नेहा मारव्या का पूरा मामला है क्या?

नेहा मारव्या ने महिला आईएएस अधिकारियों के व्हाट्सएप ग्रुप में सीएम के प्रमुख सचिव पर आरोप लगाते हुए लिखा कि "मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी के पास जब वे पदभार ग्रहण करने गई तो उन्होंने बहुत जलील किया. इतना ही नहीं, रस्तोगी ने कहा कि वे उनके कमरे में नहीं आए उन्होंने पीए के सामने गेटआउट कहा. साथ ही कहा कि मैंने तुम्हें सुधारने के लिए मेरे अंडर में रखा है और कोई काम नहीं दूंगा. इसके बाद रस्तोगी ने धमकाते हुए कहा कि – अब मैं तुम्हें देखता हूं।

नेहा ने आगे लिखा है कि ‘यह पहला मौका है जब यह ग्रुप में मैं अपनी बात शेयर कर रही हूं. यदि मैंने अब भी शेयर नहीं किया और चुप रही तो महिला, आईएएस और मानव होने के नाते शर्म आएगी. यह ग्रुप महिला आईएएस अधिकारियों का है इस वजह से वे मुझे अच्छे से गाइड कर सकेंगी और मेरी मदद भी कर सकेंगी. मैं मनरेगा में एडिशनल सीईओ के तौर पर पदस्थ थी. मैं 4 जुलाई से 7 जुलाई तक अवकाश पर थी. 7 जुलाई की शाम को मुझे सामान्य प्रशासन विभाग के उप सचिव की ओर से कॉल आया कि मेरा तबादला राजस्व विभाग में उप सचिव के तौर पर कर दिया है. इसके बाद 8 जुलाई को मैं मनरेगा से रिलीव होने पहुंच गई. वहां से प्रक्रिया पूरी कर वल्लभ भवन पहुंच गई. जब मैं मुख्यमंत्री और राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी के चैंबर में गई तो उन्होंने मुझसे कहा कि मैं उनके चैंबर में नहीं आ सकती हूं. उनके पास मुझे देने के लिए कोई काम भी नहीं है. मैंने तुम्हें सुधारने के लिए मेरे अंडर में रखा है. अब मैं तुम्हें देखता हूं. मैंने जब उनसे अपनी गलती पूछी तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. फिर मुझसे कहा कि मुझे बोलने का कोई हक नहीं है. फिर मैंने उनसे निवेदन किया कि मनरेगा के वाहन से मैं आई थी वो मैनें वापस कर दिया है. लिहाजा, मुझे किसी वाहन से घर भिजवा दें तो उन्होंने वाहन देने से इन्कार कर दिया. जब मैने उनसे पूछा कि मैं घर कैसे जाउंगी तो उन्होंने बोला कि स्टाफ से पूछ लो कि वो लोग वल्लभ भवन से घर कैसे जाते हैं. इसके बाद उन्होनें अपने पीए को बुलाकर मुझे उसके सामने जलील करते हुए मुझे गेट आउट कहा. इसके बाद उप सचिव ने मेरे लिए वाहन उपलब्ध कराने की कोशिश तो प्रमुख सचिव ने उसे भी फटकार लगाकर ऐसा करने से रोक दिया. अब मुझे क्या इस मामले में चुप रहना चाहिए. जब पीएस के पास मेरे लिए कोई काम नहीं था तो उन्होंने मुझे अपने अंडर में क्यों बुलवाया. क्या उन्होंने मुझे प्रताड़ित करने के लिए रखा है. राजस्व विभाग में मेरे कोई कॉल रिसीव नहीं कर रहा है. न कोई मैसेज के जवाब दे रहा है और न कोई वाहन दिया गया है. वल्लभ भवन के सुरक्षा गार्ड मुझे घर छोड़ने जा रहे हैं. मेरे पास अब कहने के लिए कुछ नहीं बचा है. बहुत दुखद है.’

वहीं, इस मामले में प्रमुख सचिव ने मीडिया के सामने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।


संबंधित आलेख: