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कैश कांडः ट्रांसफर और इन-हाउस जांच के बीच जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा! कहा- न्यायाधीश पद पर सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात रही

editor
  • Awaaz Desk
  • April 10, 2026 11:04 AM
Cash scandal: Justice Yashwant Verma resigns amid transfer and in-house investigation! He says, "It has been an honor to serve as a judge."

नई दिल्ली। कैश कांड मामले में फंसे इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जस्टिस वर्मा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर तत्काल प्रभाव से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। बता दें कि कैश कांड में नाम सामने आने के बाद से ही जस्टिस वर्मा लगातार विवादों में घिरे हुए थे और उनके खिलाफ आंतरिक जांच भी जारी थी। माना जा रहा है कि जांच के निष्कर्ष आने से पहले ही उन्होंने यह कदम उठाया है। यह मामला 14 मार्च 2025 का है, जब जस्टिस वर्मा के घर में अचानक आग लग गई थी। आग बुझाने पहुंची दमकल टीम को घर के अंदर भारी मात्रा में नकदी मिली थी। बताया गया कि उस समय जस्टिस वर्मा और उनकी पत्नी दिल्ली में मौजूद नहीं थे, जबकि घर पर उनकी मां और बेटी थीं। घटना के बाद कथित तौर पर जले हुए कैश के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिससे मामला और तूल पकड़ गया। इसके बाद न्यायपालिका की साख को लेकर भी सवाल उठने लगे। विवाद बढ़ने के बाद जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर दिल्ली हाईकोर्ट से उनके मूल न्यायालय इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया। साथ ही उनसे न्यायिक कार्य भी वापस ले लिया गया था। हालांकि उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया था। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आंतरिक जांच के आदेश दिए थे। 22 मार्च 2025 को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया, जो पूरे प्रकरण की जांच कर रही थी। सूत्रों के अनुसार संसदीय समिति की जांच भी अंतिम चरण में थी और जस्टिस वर्मा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की संभावना जताई जा रही थी। राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में जस्टिस वर्मा ने लिखा कि वह उन परिस्थितियों की गहराई में नहीं जाना चाहते, जिन्होंने उन्हें यह निर्णय लेने के लिए मजबूर किया। उन्होंने लिखा, ‘अत्यंत दुख के साथ मैं इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे रहा हूं। इस पद पर सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है। 

कानूनी करियर पर एक नजर
जस्टिस यशवंत वर्मा ने 8 अगस्त 1992 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में वकालत से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने न्यायपालिका में लंबी सेवा दी और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने। हालांकि अपने करियर के अंतिम चरण में लगे गंभीर आरोपों ने उनकी छवि और पद दोनों पर गहरा असर डाला।


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