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सावधान: जनगणना और एसआईआर के नाम पर 'डिजिटल डकैती' की तैयारी,उत्तराखंड एसटीएफ ने जारी किया अलर्ट

editor
  • Tapas Vishwas
  • May 15, 2026 07:05 AM
Caution: 'Digital Robbery' Being Planned in the Name of Census and SIR; Uttarakhand STF Issues Alert

उत्तराखंड में एसआईआर की प्रक्रिया और आगामी जनगणना की सुगबुगाहट के बीच साइबर अपराधी एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। ठगों के नए 'मोडस ऑपरेंडी' (काम करने के तरीके) को देखते हुए उत्तराखंड एसटीएफ ने प्रदेशव्यापी अलर्ट जारी किया है। एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने नागरिकों को आगाह किया है कि जनगणना सर्वे के नाम पर आने वाली फर्जी कॉल, संदिग्ध मैसेज और घर पहुंचने वाले अनजान लोगों से अत्यधिक सावधान रहने की जरूरत है।

उत्तराखंड में एसआईआर प्रक्रिया और आगामी जनगणना को लेकर तैयारियां तेज होते ही साइबर अपराधियों के सक्रिय होने की आशंका बढ़ गई है। इसी को देखते हुए उत्तराखंड एसटीएफ ने प्रदेशवासियों के लिए विशेष अलर्ट जारी करते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने कहा है कि जनगणना सर्वे के नाम पर फर्जी कॉल, मैसेज और संदिग्ध लोगों के जरिए साइबर ठगी की घटनाएं सामने आ सकती हैं। हाल के दिनों में सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर कई तरह के संदेश वायरल हो रहे हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि कुछ लोग खुद को जनगणना अधिकारी बताकर घर-घर पहुंच रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि ऐसे लोग लोगों की निजी जानकारी जुटाकर साइबर अपराध या चोरी जैसी घटनाओं को अंजाम दे सकते हैं। हालांकि एसटीएफ का कहना है कि वायरल संदेशों में कई बातें भ्रामक भी हो सकती हैं, लेकिन साइबर ठग अक्सर इसी तरह की अफवाहों और नकली सर्वे का सहारा लेकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। एसएसपी अजय सिंह ने स्पष्ट किया कि असली जनगणना अधिकारी कभी भी किसी नागरिक से बैंक खाते की जानकारी, एटीएम कार्ड नंबर, ओटीपी, पासवर्ड या अन्य वित्तीय जानकारी नहीं मांगते। यदि कोई व्यक्ति इस तरह की जानकारी मांगता है तो तुरंत सतर्क हो जाएं और उसकी सूचना पुलिस को दें। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को जानकारी देने से पहले उसका पहचान पत्र अच्छी तरह जांचना बेहद जरूरी है। एसटीएफ ने यह भी साफ किया है कि जनगणना प्रक्रिया में आधार कार्ड या पैन कार्ड की फोटोकॉपी जमा कराने की कोई आवश्यकता नहीं होती और न ही किसी प्रकार का शुल्क लिया जाता है। साइबर अपराधी फर्जी लिंक, मोबाइल एप, नकली वेबसाइट और ऑनलाइन फॉर्म के जरिए लोगों की निजी जानकारी चुराने की कोशिश कर सकते हैं। विशेष रूप से बुजुर्गों को सावधान रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि साइबर ठग अक्सर उन्हें आसान निशाना बनाते हैं। एसटीएफ के मुताबिक लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न जिलों में अभियान भी चलाए जा रहे हैं, ताकि आम नागरिक समय रहते सतर्क हो सकें। पुलिस अधिकारियों ने अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को कोई संदिग्ध कॉल, मैसेज या फर्जी सर्वे टीम दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर दें। एसटीएफ ने कहा कि थोड़ी सी सावधानी लोगों को बड़ी साइबर ठगी से बचा सकती है।


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