चमोली टनल हादसा: नौ जिंदगियां खत्म,सुरंग में धमाके के बाद मलबे ने ढहाया कहर,धामी सरकार देगी मृतकों के परिवारों को चार-चार लाख
उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर निर्माणाधीन विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की सुरंग में गुरुवार शाम हुए भीषण हादसे में अब तक नौ श्रमिकों के शव बरामद किए जा चुके हैं,जबकि तीन लोग अब भी सुरंग के भीतर लापता हैं। घटना के बाद से लापता लोगों के परिजन टनल के बाहर उम्मीद की आखिरी किरण बांधे राह देख रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिला अस्पताल गोपेश्वर पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना और हादसे में जान गंवाने वाले मृतकों के परिवारों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।
चमोली जिले में विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में हुआ हादसा गहरा जख्म छोड़ गया है। गुरुवार शाम हुए भारी भूस्खलन के बाद सुरंग में फंसे श्रमिकों में से नौ के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि तीन श्रमिक अब भी लापता हैं। हादसे के बाद से लापता श्रमिकों के परिवारों की नजरें रेस्क्यू अभियान पर टिकी हैं। शुक्रवार को सुबह से ही सुरंग में फंसे लोगों की तलाश के लिए युद्धस्तर पर अभियान जारी रहा। हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी और सेना समेत विभिन्न एजेंसियां मौके पर पहुंचीं। सुरंग के भीतर पानी और मलबा भरने के कारण बचाव दल को मुश्किल परिस्थितियों में अभियान चलाना पड़ रहा है। बताया गया कि हादसा गुरुवार शाम करीब पौने सात बजे उस समय हुआ, जब सुरंग के भीतर ग्रेविटी प्वाइंट पर पैकिंग का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक जोरदार धमाका हुआ और पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा सुरंग के अंदर घुस गया। देखते ही देखते वहां अफरातफरी मच गई और कई श्रमिक मलबे की चपेट में आ गए। घटना के समय सुरंग के भीतर करीब 28 श्रमिक काम कर रहे थे। इनमें ज्यादातर श्रमिक बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद छह श्रमिक बचाव कार्य में जुट गए, जबकि अन्य श्रमिकों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया। हादसे में 12 श्रमिक घायल हुए हैं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को जिला अस्पताल पहुंचकर घायल श्रमिकों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। उन्होंने चिकित्सकों और अधिकारियों से घायलों के उपचार की जानकारी ली तथा बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिजनों के लिए चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और घायलों के उपचार में किसी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी। हादसे में नौ श्रमिकों की मौत की पुष्टि के बाद जहां मृतकों के परिवारों में मातम पसरा है, वहीं तीन लापता श्रमिकों के परिजन अब भी उनके सुरक्षित लौटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। सुरंग के भीतर पानी और मलबे की स्थिति को देखते हुए बचाव दल बेहद सावधानी के साथ आगे बढ़ रहे हैं। प्रशासन की ओर से रेस्क्यू अभियान की लगातार निगरानी की जा रही है। सभी एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और सुरंग में फंसे प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने के निर्देश दिए गए हैं। हादसे ने निर्माणाधीन परियोजनाओं में श्रमिकों की सुरक्षा और सुरंग निर्माण के दौरान जोखिम प्रबंधन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।