ब्रिटेन में सत्ता परिवर्तन: एंडी बर्नहम बने नए प्रधानमंत्री,पीएम मोदी ने दी बधाई, बोले-भारत-यूके संबंधों को मिलेगी नई मजबूती
नई दिल्ली। ब्रिटेन में जारी राजनीतिक हलचलों के बीच लेबर पार्टी के नए नेता एंडी बर्नहम ने सोमवार को देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है। 'किंग ऑफ द नॉर्थ' के नाम से मशहूर बर्नहम, कीर स्टार्मर के इस्तीफे के बाद 10 डाउनिंग स्ट्रीट की कमान संभालने वाले पिछले एक दशक में ब्रिटेन के सातवें प्रधानमंत्री बने हैं। किंग चार्ल्स तृतीय ने बकिंघम पैलेस में उन्हें औपचारिक रूप से नई सरकार बनाने का न्योता दिया।
बर्नहम के पदभार संभालते ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें ट्वीट (एक्स) कर बधाई दी और दोनों देशों के रिश्तों में नए अध्याय की शुरुआत का भरोसा जताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई देते हुए कहा कि भारत और ब्रिटेन साझा लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े हुए हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक, रक्षा और जन-जन के संबंधों को लेकर व्यापक सहयोग मौजूद है। पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि इसी महीने से लागू हो रहे 'व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते के साथ दोनों देशों की द्विपक्षीय साझेदारी और ज्यादा मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम के साथ मिलकर भारत-ब्रिटेन की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने तथा 'साझा विज़न 2035' को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह उत्सुक हैं। बकिंघम पैलेस से लौटने के बाद 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर अपने पहले राष्ट्र के नाम संबोधन में पीएम एंडी बर्नहम ने देश में राजनीतिक स्थिरता बहाल करने का संकल्प लिया। उन्होंने माना कि पिछले 10 वर्षों में बार-बार प्रधानमंत्री बदलने से जनता का राजनीति से भरोसा उठा है। बर्नहम ने कड़े शब्दों में कहा, मैं पूरी तरह महसूस करता हूं कि 2016 के बाद मैं इस सत्ता के गलियारे में आने वाला सातवां प्रधानमंत्री हूं। यह आत्ममंथन का समय है। लोग राजनीति से निराश हैं और हमें स्वीकार करना होगा कि हम उतना अच्छा काम नहीं कर पाए जितना करना चाहिए था। अब हमें बेहतर प्रदर्शन करना होगा। बर्नहम ने अपनी सरकार को ब्रिटेन के लिए 'सर्किट ब्रेकर' बताते हुए घोषणा की कि उनकी सरकार पिछले 40 वर्षों के सबसे बड़े राजनीतिक और आर्थिक सुधारों को लागू करेगी। 1980 के दशक की आर्थिक नीतियों का जिक्र करते हुए नए ब्रिटिश पीएम ने कहा कि पुराने फैसलों के कारण सत्ता का अत्यधिक केंद्रीकरण हुआ और औद्योगिक क्षेत्रों का पतन हो गया। उनकी सरकार अब सत्ता का विकेंद्रीकरण कर निर्णय लेने की ताकत देश के हर हिस्से तक पहुँचाएगी। सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत नियंत्रण में लाकर उन्हें आम लोगों के लिए किफायती बनाया जाएगा। बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत से राहत देने के लिए सरकार द्वारा योजनाओं और उनके वित्तीय खाके की घोषणा जल्द की जाएगी। बर्नहम के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक स्थिरता लाने के साथ-साथ लोकलुभावन पार्टी 'रिफॉर्म यूके' के बढ़ते प्रभाव को रोकना है। भारत के साथ सीईटीए लागू होने के इस दौर में, दोनों देशों के आर्थिक और कूटनीतिक रिश्तों पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।